मंदार तराई में 18 जोड़ों ने लिए सात फेरे, सामूहिक विवाह बना सामाजिक समरसता का उत्सव
बौंसी/बांका/अंगभारत। आस्था, परंपरा और सामाजिक सहयोग का अद्भुत संगम आज मंदार की पावन धरती पर देखने को मिला, जहां 18 जोड़ों ने एक साथ सात फेरे लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत की। मंदार पर्वत की तराई आज उल्लास और उत्सव में डूबी रही। मंदार तरार्ड आर्ट एंड क्राफ्ट विलेज परिसर में 18 जोड़ों का भव्य सामूहिक विवाह समारोह पूरे पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ। सजे-धजे मंडप, रंग-बिरंगी रोशनी और मंगल गीतों की गूंज ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक और उत्सवी बना दिया। बांका जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से आए 18 जोड़ों के लिए विशेष मंडप तैयार किए गए थे। योग्य पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत विवाह संस्कार संपन्न कराया गया। सबसे पहले सभी जोड़ों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई, जिसके बाद सात फेरे और सिंदूरदान की रस्म पूरी हुई। हर पल को यादगार बनाने के लिए मंच से लगातार आशीर्वचन और शुभकामनाओं की बौछार होती रही। इस आयोजन का नेतृत्व आर्ट एंड क्राफ्ट विलेज की संवेदक पूजा अग्रवाल और सामाजिक कार्यकर्ता मनीष अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम संयोजक कौशल बजाज व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करते नजर आए। पूरी टीम ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी जोड़े या उनके परिजनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। विवाह के बाद नवदंपतियों को गृहस्थी की शुरुआत के लिए उपयोगी उपहार भेंट किए गए। दैनिक जरूरत के सामान से सजे इन उपहारों ने जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर संतोष की मुस्कान ला दी।आयोजकों ने बताया कि इस तरह के सामूहिक विवाह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होते हैं और समाज में आपसी सहयोग व समरसता की भावना को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी समां बांध दिया। गायक अनिल कुमार की सुरीली आवाज पर उपस्थित लोग झूम उठे। संगीत, सजावट और सामाजिक एकजुटता का ऐसा संगम मंदार की तराई को एक जीवंत महोत्सव में बदलता नजर आया। वाकई, जब समाज एक साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेता है, तो ऐसे आयोजन केवल विवाह नहीं, बल्कि विश्वास और सहयोग की नई इबारत लिखते हैं। मौके पर समाजसेवी राजाराम अग्रवाल अपनी पत्नी के साथ एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Mohan Milan