यज्ञ से होता है दुख:-दारिद्र्य का नाश:- आचार्य कृपा शंकर जी महाराज
कन्हैया महाराज आलमनगर मधेपुरा । परमसिद्ध आचार्य कृपा शंकर जी महाराज के सान्निध्य में बाबा सर्वेश्वर नाथ मंदिर प्रांगण में हो रहे नौ दिवसीय दिव्या श्रीराम कथा कार्यक्रम आयोजन का शुभारंभ किया गया ! जिसमें विस उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने दीप पज्वलित कर नौ दिवसीय दिव्या श्रीराम कथा कार्यक्रम का शुभारंभ किया ! वही भक्तों की भारी संख्या में उमड़ी भीड़ अहले सुबह से हजारों श्रद्धालुओं को देखा गया। वहीं यजमान महेश मोहन झा व उनकी पत्नी रानी देवी के द्वारा पूजा अर्चना और महाआरती कर श्रीराम कथा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।पूजा अर्चना और महाआरती के बाद श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य कृपा शंकर जी महाराज ने कहा कि सारे जप-तप निष्फल हो जाते हैं, तब यज्ञ ही सब प्रकार से रक्षा करता है। सृष्टि के आदिकाल से प्रचलित यज्ञ सबसे पुरानी पूजा पद्धति है। आज आवश्यकता है यज्ञ को समझने की। वेदों में अग्नि परमेश्वर के रूप में वंदनीय है। यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म माना गया है। समस्त भुवन का नाभि केंद्र यज्ञ ही है। यज्ञ की किरणों के माध्यम से संपूर्ण वातावरण पवित्र व देवगम हो जाता है। यज्ञ भगवान विष्णु का ही अपना एक स्वरूप है। वेदों का संदेश है कि शाश्वत सुख और समृद्धि की कामना करने वाले मनुष्य यज्ञ को अपना नित्य कर्तव्य अवश्य समझें। भगवान श्रीकृष्ण श्रीमद्भगवत गीता में अर्जुन से कहते हैं, हे अर्जुन! जो यज्ञ नहीं करते हैं, उनको परलोक तो दूर यह लोक भी प्राप्त नहीं होता है। जिन्हें स्वर्ग की कामना हो, जिन्हें जीवन में आगे बढ़ने की आकांक्षा हो उन्हें यज्ञ अवश्य करना चाहिए। यज्ञ कुंड से अग्नि की उठती हुई लपटें जीवन में ऊंचाई की तरह उठने की प्रेरणा देती हैं। यज्ञ में मुख्यत: अग्नि देव की पूजा का महत्व होता है।
यज्ञ करने वाले बड़भागी होते हैं। इस लोक में उनका दु:ख-दारिद्रय तो मिटता ही है, साथ ही परलोक में भी सद्गति की प्राप्ति होती है। वहीं इसमें आचार्य कृपा शंकर जी महाराज के आए संकीर्तन मंडली ने एक से एक भजन प्रस्तुत कर हजारों श्रद्धालुओं का मन मोह लिया ! वही नगर पंचायत व प्रखंड क्षेत्र सहित विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्त भाग लिए।