पद्मश्री प्रो. एचसी वर्मा की पुस्तक कैलकुलस के लोकार्पण कार्यक्रम में टीएमबीयू के कुलपति ने की शिरकत
भागलपुर अंगभारत। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जवाहर लाल को आईआईटी कानपुर के सेवानिवृत्त भौतिकी के प्रोफ़ेसर पद्मश्री प्रोफ़ेसर एच. सी. वर्मा द्बारा लिखित कैलकुलस पुस्तक के विमोचन समारोह में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह कार्यक्रम मंगलवार को कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना में आयोजित किया गया था।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रोफ़ेसर वर्मा की पुस्तक कैलकुलस पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसे छात्रों में गणितीय सोच विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मूल्यवान संसाधन गणित को मुख्य विषय के रूप में पढ़ने वाले छात्रों को लाभान्वित करेगा और शिक्षकों और शिक्षाविदों के लिए एक उपयोगी संदर्भ के रूप में काम करेगा।
कुलपति प्रो. जवाहर लाल ने कहा की कैलकुलस एक गणितीय अध्ययन है। यह विभिन्न प्रकार के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। इसका उपयोग न केवल गणित के क्षेत्रों में होता है बल्कि फिजिक्स, सांख्यिकी, इकोनॉमिक्स आदि क्षेत्रों में भी खूब होता है। कैलकुलस का उपयोग जीवन के हरेक कदम पर है। बिना गणित के जीवन का कोई भी काम संभव नहीं है। सामान्य जीवन में भी मैथेमेटिक्स का सभी जगह उपयोग है।
बिहार में गणितज्ञों की कोई कमी नहीं है। जीरो अंक देने वाले बिहार के आर्यभट्ट की प्रसिद्धि जगजाहिर है। जीरो के आधार पर ही स्वामी विवेकानंद ने शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में अध्यात्म पर जोर देते हुए अपनी ओजपूर्ण संबोधन से दुनिया को हतप्रभ कर दिया था। प्रो. लाल ने कहा कि एचसी वर्मा की पुस्तक कॉन्सेप्ट ऑफ फिजिक्स ने जो ख्याति प्राप्त की है, वह भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य है। इस पुस्तक पर फिल्म भी बन चुकी है। इसी पुस्तक की ख्याति के कारण प्रो. एचसी वर्मा को पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजा गया है।
उन्होंने आशा व्यक्त किया है कि प्रो. वर्मा द्बारा लिखित पुस्तक कैलकुलस द प्रिंसेस ऑफ मैथेमेटिक्स की भी ख्याति उसी रूप में होगी। यह पुस्तक कैलकुलस का घूंघट उठा देगी जिससे आने वाले समय में प्रो. एचसी वर्मा को भारत र‘ अवॉर्ड भी मिल सकता है। कुलपति ने भरे मंच से प्रो. एचसी वर्मा को भारत र‘ देने की मांग की। जिसका उपस्थित बुद्धिजीवियों ने पुरजोर समर्थन भी किया।