शिक्षामंच बिहार की मासिक गोष्ठी संपन्न
मधेपुरा, अंगभारत । शिक्षामंच बिहार की दशम मासिक गोष्ठी दिनांक 3० मार्च 2०25 रविवार को संपन्न हुई। गोष्ठी में मुख्य अतिथि डा० प्रवीण शर्मा ,अध्यक्ष शिक्षामंच हरियाणा,हमसबों के साथ अंततक उपस्थित रहीं तथा उन्होंने सभी कवयित्रियों के द्बारा की गई काव्य प्रस्तुतियों पर अपनी सटीक, अर्थवत्तापूणã टिप्पणियां कीं।साथ ही अपनी ओजपूर्ण वाणी में राष्ट्र की वीरांगनाओं के सम्मान में अपनी एक कविता का पाठ किया।संस्थापक डा०नरेश नाज ने अपनी व्यस्तता के बावजूद गोष्ठी में काफी समय तक जुडे रहकर हमारा मनोबल बढाया, मार्गदर्शन किया और अपनी गज़ल का सस्वर पाठकर सबको मंत्रमुग्ध कर लिया।गोष्ठी की शुरुआत में अध्यक्ष डा०शांति यादव ने मुख्य अतिथि एवं सभी कवयित्रियों का स्वागत किया।गोष्ठी का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ जिसे डा० मीना परिहार ने अपना सुमधुर स्वर दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता तथा संचालन के दायित्व का डा०शांंति यादव ने कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। रितिका कुमारी,नीतू कुमारी,डा० बन्दना कुमारी, मेधा झा ,श्वेता गुप्ता ,संगीता चौरसिया , डा० पंकज वासिनी ने काव्य-पाठ कर तथा डा०मीना परिहार ने गज़ल की प्रस्तुति कर गोष्ठी को सफल बनाया । भिन्न-भिन्न विषयों पर सार्थक व प्रभावपूर्ण कविताओं की प्रस्तुति अद्भुत रही।अध्यक्ष डा० शांति यादव ने ’’वैदेही का अंतर्द्वंद्ब ’’ नामक अपने खंंडकाव्य के एक सर्ग का पाठ किया जिसने सबों को अभिभूत कर दिया।गोष्ठी में जहां एक ओर नीतू कुमारी,रितिका कुमारी व डा० बन्दना कुमारी जैसी नवोदितों की कविताओं ने आने वाले समय में कविता के क्षेत्र में स्त्री की अवश्यंभावी सशक्त लेखनी के प्रति आश्वस्त किया , वहीं दूसरी ओर डा०प्रवीण शर्मा, डा० मीना परिहार ,श्वेता गुप्ता ,डा० पंकजवासिनी , मेधा झा , संगीता चौरसिया एवं डा० शांति यादव जैसी स्थापित, वरिष्ठ कवयित्रियों की गंभीर कविताओं ने हमारे समय व समाज की विभिन्न परतों को उघेरते हुए सवाल खड़े किए। समग्रत: गोष्ठी सफल रही।अध्यक्ष डा० शांति यादव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।