रांची, अंग भारत। झारखंड के किसान इस साल मानसून की बेरुखी से गहरे संकट में हैं। राज्य के 24 में से 18 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खेती-किसानी पर सूखे के बादल मंडराने लगे हैं। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 5 अगस्त के बीच केवल 6 जिलों में सामान्य वर्षा हो पाई है। राहत की खबर यह है कि मौसम विभाग ने 6 अगस्त के लिए राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे किसानों को थोड़ी उम्मीद जगी है।
मानसून की हकीकत
झारखंड में मानसून का ग्राफ इस बार काफी नीचे रहा है। आंकड़ों की बात करें तो इस अवधि में राज्य में सामान्य तौर पर 559.8 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक मात्र 408 मिलीमीटर ही रिकॉर्ड हुई है। यह आंकड़ा सामान्य से 27 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग की गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर बारिश की कमी 19 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती है, तो उसे ‘सामान्य से कम’ की श्रेणी में रखा जाता है। मौजूदा स्थिति सीधे तौर पर राज्य के जल स्तर और कृषि उत्पादन पर नकारात्मक असर डाल रही है।
जिलों का हाल
राज्य में बारिश का वितरण बेहद असंतुलित है। नीचे दी गई तालिका से आप स्थिति की गंभीरता को समझ सकते हैं:
| श्रेणी | प्रभावित जिले | वर्षा की स्थिति |
|---|---|---|
| सामान्य वर्षा वाले | रांची, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, धनबाद | संतोषजनक |
| गंभीर कमी वाले | चतरा, गढ़वा, गिरिडीह, पलामू, कोडरमा, हजारीबाग | 40% से 62% तक की कमी |
| अन्य प्रभावित | शेष 12 जिले | सामान्य से कम |
विशेष रूप से चतरा, गढ़वा, गिरिडीह, पलामू, कोडरमा और हजारीबाग में हालात बदतर हैं। इन क्षेत्रों में बारिश की कमी 62 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यहां के खेतों में दरारें पड़ना शुरू हो गई हैं और सिंचाई के सीमित संसाधन भी अब जवाब देने लगे हैं।
कृषि पर असर
झारखंड की अर्थव्यवस्था की धुरी खेती है, और धान की रोपनी के लिए जुलाई का समय सबसे निर्णायक होता है। बिचड़ा तैयार करने से लेकर रोपनी तक के लिए पानी का होना अनिवार्य है। बारिश न होने के कारण धान की खेती का चक्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो राज्य के एक बड़े हिस्से में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत बर्बाद होने का डर है।
मौसम विभाग अलर्ट
बंगाल की खाड़ी में बनने वाले एक नए सिस्टम ने मौसम विभाग को सक्रिय कर दिया है। विभाग ने 6 अगस्त के लिए राज्य के कई हिस्सों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसके तहत भारी बारिश की प्रबल संभावना जताई गई है। इसके अलावा, 9 अगस्त तक विभिन्न जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ भी जारी किया गया है। यदि यह सिस्टम प्रभावी रहा, तो धान के खेतों को बड़ी संजीवनी मिल सकती है।
पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में सबसे अधिक 166.4 मिलीमीटर बारिश गोड्डा में दर्ज की गई है। वहीं, सरायकेला में पारा 36.7 डिग्री सेल्सियस और रांची के कांके में तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
शहरों का तापमान
बारिश न होने और उमस के कारण शहरों का तापमान भी असामान्य रहा है। बुधवार को राजधानी रांची में बादलों की आवाजाही रही, लेकिन चिलचिलाती गर्मी का असर कम नहीं हुआ। प्रमुख शहरों की स्थिति इस प्रकार रही:
- जमशेदपुर: अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री और न्यूनतम 26.6 डिग्री रहा।
- डाल्टनगंज: अधिकतम 34 डिग्री और न्यूनतम 24.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
- बोकारो: यहां का पारा अधिकतम 34.1 डिग्री और न्यूनतम 26.1 डिग्री रहा।
- चाईबासा: अधिकतम 35.8 डिग्री और न्यूनतम 25.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
आने वाले 96 घंटे झारखंड की कृषि और जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मौसम विभाग का पूर्वानुमान अगर सटीक साबित होता है, तो किसानों के चेहरों पर फिर से रौनक लौट सकती है। स्थिति पर प्रशासन और मौसम केंद्रों की पैनी नजर बनी हुई है।







