दो संस्थानों की सार्थक पहल से दस महीने बाद मां-बेटे का हुआ मिलन
मधेपुरा, अंग भारत। मानवता, सेवा और संवेदना की एक बेहद मार्मिक मिसाल मधेपुरा में देखने को मिली, जहां जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज और श्रृंगी ऋषि सेवा फाउंडेशन परिवार के सहयोग से पिछले दस महीने से अपने परिवार से बिछड़ी एक बुजुर्ग महिला को आखिरकार उनके परिजन से मिलाया गया।मंगलवार की देर रात जब मां और बेटे का मिलन हुआ, तो वहां मौजूद हर आंख नम और हर दिल सुकून से भर उठा।करीब दस महीने पूर्व यह बुजुर्ग महिला सड़क किनारे बेसुध हालत में पड़ी मिली थीं, जिन्हें एक संवेदनशील एंबुलेंस चालक ने तत्परता दिखाते हुए जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज, मधेपुरा में भर्ती कराया। उस समय महिला की हालत अत्यंत गंभीर थी, वह न बोल पा रही थीं और न ही किसी को पहचान पा रही थीं।इसके बावजूद जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने पूरी निष्ठा और संवेदना के साथ उनका इलाज और सेवा की। लगातार देखभाल और उपचार के बाद धीरे-धीरे बुजुर्ग महिला की हालत में सुधार होने लगा।कुछ दिन पूर्व महिला को होश आने पर उन्होंने अपने घर के बारे में जानकारी दी और बताया कि वह समस्तीपुर जिले के काबलीराम क्षेत्र की रहने वाली हैं।इस महत्वपूर्ण जानकारी को मेडिकल कॉलेज के उपाधीक्षक डॉ. प्रियरंजन भास्कर ने श्रृंगी ऋषि सेवा फाउंडेशन के ग्रुप में साझा किया, जिसके बाद संस्था के सदस्यों ने परिजनों की तलाश शुरू की। लगातार प्रयास और खोजबीन के बाद महिला के पुत्र सतीश सिह से संपर्क स्थापित हुआ। सूचना मिलते ही मंगलवार की देर रात सतीश सिह जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सभी औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मां को उनके पुत्र के सुपुर्द किया। करीब दस महीने बाद मां-बेटे के इस भावुक मिलन का दृश्य बेहद सुकून देने वाला और मानवता को जीवंत करने वाला था।यह घटना न सिर्फ श्रृंगी ऋषि सेवा फाउंडेशन की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और कर्मियों की मानवीय सोच की भी सराहनीय मिसाल है। यह कहानी बताती है कि जब सेवा, संवेदना और सहयोग साथ आते हैं, तो टूटे रिश्ते भी फिर से जुड़ जाते हैं।

