मॉस्को,अंग भारत। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि दुनिया के करीब 30 देशों ने रूस के साथ नवाचार और तकनीकी क्षेत्र में मिलकर काम करने में दिलचस्पी दिखाई है। इनमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका, मध्य पूर्व और दुनिया के दूसरे हिस्सों के देश भी शामिल हैं। पुतिन के इस बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
अलग-अलग देशों से आए सहयोग के प्रस्ताव
पुतिन ने शुक्रवार को निज़नी नोवगोरोड में आयोजित ‘स्ट्रॉन्ग आइडियाज फॉर ए न्यू एरा’ फोरम के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस फोरम का आयोजन एजेंसी फॉर स्ट्रैटेजिक इनिशिएटिव्स (एएसआई) की ओर से किया जाता है। इस साल एजेंसी अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रही है।रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि इस फोरम के जरिए रूस के अलग-अलग क्षेत्रों के अलावा विदेशों से भी कई तरह के नए और उपयोगी प्रोजेक्ट के प्रस्ताव मिले हैं। इनमें तकनीक, उद्योग और दूसरे क्षेत्रों से जुड़े विचार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों में से बेहतर परियोजनाओं को छांटकर सरकार के सामने रखा जाएगा, ताकि आगे उन पर काम करने की संभावना देखी जा सके।पुतिन ने कहा कि रूस को सिर्फ अपने देश के अलग-अलग हिस्सों से ही प्रस्ताव नहीं मिले हैं, बल्कि करीब 30 विदेशी देशों ने भी अपने विचार और परियोजनाएं भेजी हैं। उन्होंने खास तौर पर यूरोप, उत्तरी अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों का जिक्र किया।
तकनीकी सहयोग को लेकर बढ़ रही दिलचस्पी
पुतिन के मुताबिक, दूसरे देशों से आए इन प्रस्तावों से रूस के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं। तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करने से रूस को नई तकनीक, नए अनुभव और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।उन्होंने कहा कि आज के दौर में दुनिया के सामने कई तरह की नई चुनौतियां हैं। ऐसे में केवल पुराने तरीकों के भरोसे आगे नहीं बढ़ा जा सकता। नए विचारों और व्यावहारिक योजनाओं पर काम करना जरूरी है। पुतिन ने कहा कि रूस इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और नवाचार को देश के विकास का एक अहम हिस्सा मान रहा है।
संप्रभुता और आत्मनिर्भरता पर जोर
रूसी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में देश की संप्रभुता को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि रूस अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है। उनका कहना था कि देश के लिए यह जरूरी है कि वह महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी क्षमता को मजबूत करे और किसी दूसरे देश पर जरूरत से ज्यादा निर्भर न रहे।पुतिन ने कहा कि नए विचारों और परियोजनाओं का मकसद सिर्फ आर्थिक फायदा कमाना नहीं होना चाहिए। इनका इस्तेमाल आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य तैयार करने और आम लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने में भी होना चाहिए।उन्होंने कहा कि रूस अपने नागरिकों की भलाई और देश की मजबूती के लिए लगातार काम कर रहा है। इसी दौरान उन्होंने भरोसा जताया कि रूस मजबूत है और आगे भी मजबूत बना रहेगा।
फोरम में दुनिया के सामने रूस की नई तस्वीर
‘स्ट्रॉन्ग आइडियाज फॉर ए न्यू एरा’ फोरम रूस में नए विचारों और परियोजनाओं पर चर्चा का एक बड़ा मंच है। इसमें कारोबारी, तकनीकी विशेषज्ञ, गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लोग और सरकारी अधिकारी हिस्सा लेते हैं। यहां आर्थिक विकास के साथ-साथ तकनीक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा होती है।फोरम में आने वाले प्रस्तावों में ऐसे विचारों पर खास ध्यान दिया जाता है, जिन्हें आगे चलकर जमीन पर उतारा जा सके। रूस सरकार इन परियोजनाओं के जरिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों में नई संभावनाएं तलाशने की कोशिश कर रही है।
विदेशी प्रस्तावों से रूस को कितनी मदद मिलेगी?
पुतिन का कहना है कि करीब 30 देशों से मिले प्रस्ताव रूस के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर इन परियोजनाओं पर आगे काम होता है तो इससे रूस को तकनीकी और आर्थिक क्षेत्र में फायदा मिल सकता है। साथ ही दूसरे देशों के साथ उसके संपर्क और सहयोग का दायरा भी बढ़ सकता है।हालांकि पुतिन ने अपने बयान में इन 30 देशों के नाम नहीं बताए। यह भी साफ नहीं किया गया कि किन देशों ने किस तरह की परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव दिए हैं। फिलहाल उनका दावा रूस के साथ तकनीकी और नवाचार से जुड़े संभावित अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ओर इशारा करता है।रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि आने वाले समय में नए विचारों और नई तकनीकों की भूमिका और बढ़ेगी। उनके मुताबिक, रूस को बदलती दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। इसके लिए देश के भीतर प्रतिभा और नए विचारों को बढ़ावा देने के साथ-साथ विदेशों से आने वाले उपयोगी प्रस्तावों पर भी ध्यान देना जरूरी है।पुतिन के इस बयान से साफ है कि रूस तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर तलाश रहा है। अब यह देखना होगा कि इन देशों के प्रस्तावों में से कितनी परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं और उनका रूस के साथ वास्तविक सहयोग में कितना असर दिखाई देता है।







