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कलकत्ता हाई कोर्ट के 45वें मुख्य न्यायाधीश बने रवींद्र विठ्ठलराव घुगे, राज्यपाल ने दिलाई शपथ

कोलकाता,अंग भारत। न्यायमूर्ति रवींद्र विठ्ठलराव घुगे ने बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के 45वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। हाई कोर्ट के नंबर एक कक्ष में सुबह करीब 10 बजे आयोजित समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली।

समारोह में कई बड़े चेहरे रहे मौजूद

शपथ ग्रहण समारोह में न्यायपालिका और राज्य सरकार से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और न्यायिक अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए।देश के अलग-अलग हाई कोर्ट के मौजूदा और पूर्व न्यायाधीशों ने भी समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति घुगे को नई जिम्मेदारी संभालने के लिए शुभकामनाएं दी गईं।उनकी नियुक्ति को कलकत्ता हाई कोर्ट के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अदालत में लंबे समय से बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। ऐसे में नियमित मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में अदालत के कामकाज को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है।

बंबई हाई कोर्ट में रहा लंबा अनुभव

मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले न्यायमूर्ति रवींद्र विठ्ठलराव घुगे बंबई हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे रहे थे। इसी साल जून में उन्हें बंबई हाई कोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था।इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए जाने की अधिसूचना जारी की गई। उनकी नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम की सिफारिश और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद हुई।न्यायमूर्ति घुगे को न्यायिक मामलों का काफी लंबा अनुभव है। बंबई हाई कोर्ट में उन्होंने कई अहम मामलों की सुनवाई की और करीब 13 साल तक न्यायिक जिम्मेदारियां निभाईं।

1990 में शुरू किया था वकालत का सफर

न्यायमूर्ति घुगे का कानूनी क्षेत्र से जुड़ाव काफी पुराना है। बंबई हाई कोर्ट की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शाहजी लॉ कॉलेज और औरंगाबाद के एम.पी. लॉ कॉलेज से पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम की पढ़ाई पूरी की।उन्होंने वर्ष 1990 में वकालत शुरू की थी। शुरुआत में उन्होंने बंबई हाई कोर्ट के साथ-साथ औद्योगिक और श्रम न्यायालयों में मामलों की पैरवी की। अपने शुरुआती कानूनी करियर में उन्होंने श्रमिकों और श्रमिक संगठनों से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया।बाद में उनका काम बड़े निजी उद्योगों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से जुड़े मामलों तक भी पहुंचा। उन्होंने भारतीय विधिज्ञ परिषद से संबंधित मामलों में भी पैरवी की। इस तरह उनका अनुभव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग तरह के कानूनी मामलों में उन्हें काम करने का मौका मिला।

2013 में बने हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश

न्यायमूर्ति घुगे को 21 जून 2013 को बंबई हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में नियमित रूप से न्यायिक जिम्मेदारियां संभालीं।करीब 13 वर्षों के न्यायिक अनुभव के दौरान उन्होंने अलग-अलग तरह के मामलों की सुनवाई की। इसी लंबे अनुभव के आधार पर अब उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट की कमान सौंपी गई है।

लंबित मामलों के निपटारे पर रहेगी नजर

कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति घुगे ने ऐसे समय जिम्मेदारी संभाली है, जब अदालत के सामने बड़ी संख्या में लंबित मामलों का बोझ है।ऐसे में उनके सामने अदालत के कामकाज को सुचारू बनाने और लंबित मामलों के निपटारे की गति बढ़ाने की चुनौती होगी। उनकी नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि नियमित मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में अदालत की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।न्यायमूर्ति घुगे के लंबे न्यायिक अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि वह कलकत्ता हाई कोर्ट में मामलों के तेजी से निपटारे और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दे सकते हैं। अब आने वाले समय में उनके नेतृत्व में अदालत के कामकाज में क्या बदलाव देखने को मिलता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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