मुरलीगंज, मधेपुरा,अंग भारत। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर के 70वें जन्मदिवस और संस्था के 45 वर्ष पूरे होने के मौके पर बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल आश्रम में चार दिवसीय बिहार महोत्सव का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन में मुरलीगंज के प्रतिष्ठित कपड़ा व्यवसायी और समाजसेवा से जुड़े शिवप्रकाश गाड़ोदिया तथा अंकित कुमार को विशेष आमंत्रण पर शामिल होने का मौका मिला।
बिहार की संस्कृति और सेवा भावना की दिखी झलक
चार दिनों तक चले बिहार महोत्सव में राज्य की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सरोकारों को सामने रखा गया। इस दौरान बिहार की लोक संस्कृति से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही समाजसेवा, सकारात्मक जीवनशैली और लोगों को बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करने वाले कार्यक्रम भी हुए।आयोजन का उद्देश्य बिहार की संस्कृति को देश और दुनिया के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने के साथ-साथ सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के भाव को मजबूत करना भी रहा।
मुख्यमंत्री ने किया महोत्सव का उद्घाटन
चार दिवसीय बिहार महोत्सव का उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया। उद्घाटन कार्यक्रम में बिहार की संस्कृति और राज्य की विकास यात्रा से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई।महोत्सव के समापन कार्यक्रम में बिहार के शिक्षा मंत्री भी मौजूद रहे। इस दौरान आयोजन से जुड़े लोगों और प्रतिभागियों ने चार दिनों के कार्यक्रम के अनुभव साझा किए।
श्रीश्री रविशंकर से की मुलाकात
महोत्सव के अंतिम दिन शिवप्रकाश गाड़ोदिया और अंकित कुमार ने आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर से मुलाकात की। दोनों ने उनसे आशीर्वाद लिया और बातचीत के दौरान बिहार तथा खासकर कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लोगों के लिए स्वस्थ, सुखी और समृद्ध जीवन की कामना की।श्रीश्री रविशंकर से मुलाकात को शिवप्रकाश गाड़ोदिया ने अपने लिए विशेष अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और समाज से जुड़े रहने के साथ-साथ सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
योग और ध्यान से बेहतर जीवन का संदेश
शिवप्रकाश गाड़ोदिया ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से योग, ध्यान, सेवा और सकारात्मक जीवनशैली के जरिए लोगों को बेहतर जीवन जीने का संदेश दिया जा रहा है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता के बीच योग और ध्यान लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।उन्होंने कहा कि बिहार महोत्सव जैसे आयोजन में शामिल होना उनके लिए गर्व और प्रेरणा की बात है। बिहार की संस्कृति और यहां के लोगों की सेवा भावना को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने का यह अच्छा माध्यम है।
समाजसेवा को आगे बढ़ाने पर जोर
शिवप्रकाश गाड़ोदिया ने कहा कि किसी भी सामाजिक आयोजन की असली सफलता तभी है, जब उससे समाज में सकारात्मक बदलाव आए। लोगों के बीच सेवा, सहयोग और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना जरूरी है।उन्होंने कहा कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था का काम नहीं है। हर व्यक्ति अपने स्तर पर जरूरतमंद लोगों की मदद कर समाज के विकास में योगदान दे सकता है।महोत्सव में विशेष आमंत्रण पर शामिल हुए शिवप्रकाश गाड़ोदिया और अंकित कुमार के लिए यह आयोजन न केवल बिहार की संस्कृति को करीब से देखने और प्रस्तुत करने का अवसर रहा, बल्कि श्रीश्री रविशंकर से मुलाकात और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना भी यादगार अनुभव रहा।चार दिनों तक चले इस बिहार महोत्सव में बिहार की संस्कृति, सेवा भावना और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों तक पहुंचा। आयोजन के जरिए बिहार की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सरोकारों को एक बड़े मंच पर रखने की कोशिश की गई।







