भागलपुर,अंग भारत। जिले के सुल्तानगंज प्रखंड में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। प्रखंड की नौ पंचायतों में बाढ़ का पानी घुस जाने से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं। निचले इलाकों में पानी भरने के कारण लोगों के सामने रहने, खाने-पीने और पशुओं के चारे की समस्या बढ़ती जा रही है। कई जगहों पर लोगों को पानी के बीच से होकर जरूरी काम के लिए आने-जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्थानीय विधायक प्रोफेसर ललित नारायण मंडल और जिला परिषद सदस्य आशा जयसवाल ने प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली और राहत व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों से आवश्यक कदम उठाने को कहा।
आठ जगहों पर शुरू हुआ सामुदायिक किचन
जनप्रतिनिधियों के निर्देश के बाद सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में आठ जगहों पर सामुदायिक किचन शुरू किया गया है। इन रसोइयों के माध्यम से बाढ़ पीड़ित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का उद्देश्य है कि बाढ़ के कारण अपने घरों में खाना नहीं बना पाने वाले लोगों को कम से कम भोजन की परेशानी न हो।सामुदायिक किचन शुरू होने से कुछ इलाकों के लोगों को राहत मिली है। हालांकि, कई पंचायतों के ग्रामीणों का कहना है कि राहत व्यवस्था अभी सभी प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाई है।
नौ पंचायतें बाढ़ की चपेट में
ग्रामीणों के मुताबिक गनगनिया से लेकर किशनपुर पंचायत तक कुल नौ पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं। इन इलाकों में बड़ी संख्या में घरों और आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंच गया है। लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी लगातार फैलने से रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है।बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि प्रशासन की ओर से अब तक गनगनिया, महेशी, मोतीचक और किशनपुर पंचायत में ही सामुदायिक किचन संचालित किया जा रहा है। प्रभावित बाकी पंचायतों में अभी तक रसोई शुरू नहीं होने से लोगों के सामने भोजन का संकट बना हुआ है।
खाने के साथ पशु चारे की भी परेशानी
बाढ़ का असर केवल लोगों तक सीमित नहीं है। निचले इलाकों में पानी भरने के कारण पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है। खेतों और आसपास के कई इलाकों में पानी भर जाने से हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वहीं, बाहर से चारा लाने में भी लोगों को परेशानी हो रही है।ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी संख्या में परिवारों के पास मवेशी हैं और बाढ़ के दौरान उनकी देखभाल करना अतिरिक्त चुनौती बन गया है। चारे की कमी के कारण कई मवेशियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में प्रशासन को मानव राहत के साथ पशुओं के लिए भी चारे की व्यवस्था करनी चाहिए।
सभी पंचायतों में राहत पहुंचाने की मांग
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी नौ प्रभावित पंचायतों में तत्काल राहत व्यवस्था शुरू की जाए। ग्रामीणों ने सामुदायिक किचन की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की है।इसके अलावा पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने, जलजमाव वाले क्षेत्रों में जरूरी सुविधाएं पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की भी मांग की गई है।ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण पहले ही रोजगार और रोजमर्रा के काम प्रभावित हैं। ऐसे में अगर समय पर भोजन, चारा और अन्य जरूरी राहत सामग्री नहीं मिली तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से सभी पंचायतों में समान रूप से राहत पहुंचाने की अपील की है।प्रभावित इलाकों के निरीक्षण के दौरान दर्जनों बाढ़ पीड़ित और स्थानीय लोग मौजूद थे। लोगों ने जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं और जल्द राहत उपलब्ध कराने की मांग की।







