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धौनी रेलवे स्टेशन संघर्ष समिति की बड़ी जीत, कविगुरु एक्सप्रेस ठहराव को मिली मंजूरी

रेलवे की हरी झंडी से यात्रियों में खुशी, अन्य मांगों पर भी तेज हुई कार्रवाई

रजौन/बांका/अंग भारत|  भागलपुर-मंदारहिल रेलखंड स्थित ऐतिहासिक धौनी रेलवे स्टेशन को लेकर वर्षों से चल रहा संघर्ष अब रंग लाने लगा है। स्थानीय जनता और धौनी रेलवे स्टेशन संघर्ष समिति के लगातार प्रयासों के बाद रेलवे प्रशासन ने बड़ी राहत देते हुए कविगुरु एक्सप्रेस (13015/16) के ठहराव को प्रायोगिक तौर पर मंजूरी दे दी है। पूर्व रेलवे के मालदा मंडल द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के बाद क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।

यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ

कविगुरु एक्सप्रेस के ठहराव से अब धौनी और आसपास के हजारों यात्रियों को हावड़ा और जमालपुर की यात्रा में बड़ी सुविधा मिलेगी। लंबे समय से इस ट्रेन के ठहराव की मांग की जा रही थी, जिसे अब आंशिक रूप से पूरा कर दिया गया है।

प्रतिनिधिमंडल की पहल लाई रंग

गौरतलब है कि बीते फरवरी माह में संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देउस्कर से मुलाकात कर पांच सूत्री मांग पत्र सौंपा था। इस प्रतिनिधिमंडल में मोरामा निवासी व पूर्व कुलपति मनोज सिंह, पूर्व प्राचार्य प्रो. जीवन प्रसाद सिंह, विष्णुदेव ठाकुर, प्रमोद सिंह वेल्डन और प्रकाश कुमार पंकज सहित कई गणमान्य लोग शामिल थे।रेलवे ने समिति के अध्यक्ष सिकंदर प्रसाद यादव को लिखित जवाब देते हुए बताया कि कविगुरु एक्सप्रेस के ठहराव की अनुशंसा कर दी गई है, जबकि दुमका-पटना एक्सप्रेस (13333/34) के ठहराव पर अभी तकनीकी समीक्षा चल रही है।

स्टेशन विकास कार्यों को भी मिली गति

रेलवे द्वारा जारी पत्र में अन्य मांगों पर भी सकारात्मक पहल की जानकारी दी गई है। प्लेटफॉर्म संख्या 1 और 2 पर यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त शेड निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिससे धूप और बारिश से राहत मिलेगी। इसके साथ ही स्टेशन परिसर में वाहन पार्किंग के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया तय कर दी गई है।

नई सुविधाओं पर भी चल रहा काम

प्लेटफॉर्म संख्या 2 के पूर्वी छोर पर नए गेट के निर्माण की व्यवहार्यता जांच अंतिम चरण में है। हालांकि, कम जनसंख्या और ऑनलाइन टिकट बुकिंग के बढ़ते चलन को देखते हुए फिलहाल पीआरएस (आरक्षण काउंटर) खोलने को व्यवहारिक नहीं माना गया है।

क्षेत्र में खुशी का माहौल

ब्रिटिश काल से ही महत्वपूर्ण रहे धौनी रेलवे स्टेशन को ‘अंग क्षेत्र की धरोहर’ माना जाता है। संघर्ष समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि रेलवे प्रशासन ने इन जनहित से जुड़ी मांगों पर ठोस कदम उठाए हैं।इस निर्णय के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में स्टेशन का और भी व्यापक विकास होगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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