Founder – Mohan Milan

गैस संकट से जूझते होटल-रेस्टोरेंट, कोयले के चूल्हों पर लौटा कारोबार; छात्रों की पढ़ाई पर असर

सुपौल,अंग भारत |  जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल क्षेत्र में व्यावसायिक गैस की किल्लत ने होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को गंभीर संकट में डाल दिया है। गैस आपूर्ति में रुकावट और एजेंसियों की सख्ती के कारण व्यवसायियों को मजबूरी में पुराने तरीकों की ओर लौटना पड़ रहा है। जहां पहले आधुनिक गैस चूल्हों का इस्तेमाल होता था, वहीं अब कोयले की भट्ठियां और मिट्टी के चूल्हे फिर से सक्रिय हो गए हैं।

गैस की कमी से बढ़ी मुश्किलें, कोयले पर निर्भर हुए कारोबारी

स्थानीय रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि व्यावसायिक गैस की उपलब्धता लगभग ठप हो गई है। सरकारी नियमों और निगरानी के चलते वैकल्पिक व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में व्यवसाय को चलाए रखने के लिए उन्हें कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि, यह विकल्प न केवल महंगा साबित हो रहा है, बल्कि इससे काम करने में भी कई तरह की परेशानियां सामने आ रही हैं।कोयले पर खाना बनाने में अधिक समय लगता है और श्रम भी ज्यादा करना पड़ता है। इसके अलावा किचन में धुएं की समस्या भी बढ़ गई है, जिससे कर्मचारियों को असुविधा हो रही है। कई होटल संचालकों ने बताया कि पहले जहां साफ-सुथरे और आधुनिक किचन होते थे, अब वहां धुएं से भरा माहौल देखने को मिल रहा है।

छोटे व्यापारियों और बाजार पर भी दिखा असर

गैस संकट का असर सिर्फ बड़े होटलों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे ठेला और फुटपाथ व्यवसायी भी इससे अछूते नहीं हैं। कुछ छोटे व्यापारी अभी भी घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन वे भी अनिश्चितता और कार्रवाई के डर के साये में काम कर रहे हैं।इधर बाजार में कोयले और जलावन की मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे इसकी कीमतों में भी तेजी आई है। दुकानदारों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में कोयले की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पटना में छात्रों की पढ़ाई पर पड़ा असर

दूसरी ओर, राजधानी पटना में पढ़ाई कर रहे छात्रों को भी गैस संकट का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। रसोई गैस की भारी कमी के कारण कई छात्रों को भोजन बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई छात्रों ने पढ़ाई बीच में छोड़कर अपने घर लौटना बेहतर समझा।छात्रों का कहना है कि सामान्य दिनों में 100 रुपये प्रति किलो मिलने वाली गैस अब ब्लैक मार्केट में 350 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इतना महंगा होने के बावजूद पर्याप्त गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।कुल मिलाकर, गैस संकट ने न केवल कारोबार बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित किया है, जिससे आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ रहा है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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