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रसोई गैस महंगी हुई तो मजदूरों ने छोड़ा महानगर

भागलपुर,अंग भारत। रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और भारी किल्लत ने अब मजदूर वर्ग की जिंदगी को गहराई से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। देश के बड़े शहरों—नई दिल्ली, चंडीगढ़, कोलकाता और उड़ीसा—में काम करने वाले मजदूर अब हालात से मजबूर होकर अपने गांव लौटने लगे हैं।

गैस की कीमत ने बिगाड़ा मजदूरों का बजट

नई दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन से गोड्डा जाने वाली गरीब रथ एक्सप्रेस से भागलपुर पहुंचे यात्रियों ने बताया कि जिन इलाकों में वे काम कर रहे थे, वहां गैस की कीमत 400 से 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। सीमित आय में इतनी महंगी गैस खरीद पाना उनके लिए संभव नहीं रह गया था।मजदूरों का कहना है कि रोज कमाकर खाने वाले लोगों के लिए इतनी महंगी रसोई गैस किसी बड़े संकट से कम नहीं है। आय स्थिर रहने के बावजूद खर्च लगातार बढ़ने से उनका पूरा बजट गड़बड़ा गया।

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खाना बनाना हुआ मुश्किल, लौटे अपने गांव

भागलपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे सन्हौला निवासी मिथुन यादव ने बताया कि गैस की भारी कमी के कारण खाना बनाना भी मुश्किल हो गया था। कई बार गैस उपलब्ध ही नहीं होती थी, जिससे रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा था।इसी तरह मुंगेर जिले के संग्रामपुर निवासी रवि, जो काम की तलाश में फिर से दिल्ली जा रहे थे, ने कहा कि यदि गैस नहीं मिलेगी तो वे लकड़ी या अन्य साधनों से खाना बनाकर किसी तरह गुजारा करेंगे।

मजदूरों ने बताई अपनी मजबूरी

गरीब रथ एक्सप्रेस से लौटे मोहम्मद दुरुल, नूर मोहम्मद, मोहम्मद चांद, अशोक साह, अंसार और मनोज तांती ने एक स्वर में बताया कि महानगरों में न केवल गैस की किल्लत है, बल्कि इसकी कीमत भी काफी अधिक हो गई है। ऐसे में कम आय में गुजारा करना बेहद कठिन हो गया था।उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के खर्च, किराया और अन्य जरूरी जरूरतों के बीच गैस का खर्च संभालना मुश्किल हो गया था। इसलिए मजबूरी में उन्हें घर लौटना पड़ा।

गांव में ही काम तलाशने की तैयारी

मजदूरों का कहना है कि अब वे अपने गांव और आसपास के इलाकों में ही काम-धंधा तलाशने की कोशिश करेंगे। उनका मानना है कि भले ही कम आय हो, लेकिन गांव में जीवन यापन अपेक्षाकृत सस्ता है और परिवार के साथ रहना भी संभव हो पाता है।गैस संकट ने उनकी आजीविका पर सीधा असर डाला है। यही कारण है कि अब बड़े शहरों से मजदूरों का पलायन धीरे-धीरे बढ़ता नजर आ रहा है। यह स्थिति आने वाले समय में श्रम बाजार और शहरी अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाल सकती है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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