सुपौल,अंग भारत। बिहार ग्रामीण बैंक से जुड़े अल्प बचत अभिकर्ताओं ने बैंक प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें पिछले कई महीनों से कमीशन और अन्य देय भत्तों का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अभिकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।अल्प बचत अभिकर्ता संघ के उपसचिव पंकज मिश्रा ने बताया कि बीते कई महीनों से अभिकर्ताओं को नियमित रूप से कमीशन नहीं मिल रहा है। इसके कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति का सीधा असर उनके परिवार पर पड़ रहा है, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई प्रभावित हो रही है और रोजमर्रा के खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।
सात महीने से नहीं मिला कमीशन और भत्ता
संघ के सचिव अमरेंद्र प्रसाद ने भी बैंक प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले अभिकर्ताओं को मिलने वाली सुविधाएं अब पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि करीब सात महीने से न तो कमीशन का भुगतान हो रहा है और न ही यात्रा भत्ता दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार मिलने वाला 750 रुपये प्रतिमाह मानदेय भी पिछले सात महीनों से बंद है।अभिकर्ताओं का कहना है कि जहां बैंक के नियमित कर्मियों को सभी सुविधाएं समय पर मिल रही हैं, वहीं अभिकर्ताओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है। इस कारण उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है और कई परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।
आंदोलन की चेतावनी, समाधान की मांग
अभिकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे अनिश्चितकालीन अनशन और उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने बैंक प्रबंधन से अपील की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए।इस दौरान अभिकर्ता तपन गुप्ता, जटाशंकर गुप्ता, देवचंद सिंह, सुदीप दास, किशोर गुप्ता और अमीरात मुखर्जी सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को दोहराया और कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।फिलहाल, इस मामले में बैंक प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है।









