कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को राज्य के जंगलमहल क्षेत्र में चार बड़ी जनसभाओं को संबोधित करेंगे। भाजपा ने इस दौरे को आदिवासी मतदाताओं को साधने की महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में देखा है।
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जंगलमहल में एक दिन में चार रैलियां
प्रधानमंत्री मोदी एक ही दिन में बिष्णुपुर, पुरुलिया, झाड़ग्राम और मेदिनीपुर में जनसभाएं करेंगे। यह कार्यक्रम सामान्य चुनावी दौरों से काफी अलग माना जा रहा है, क्योंकि एक दिन में चार बड़ी रैलियां करना पार्टी की आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।मोदी का यह दौरा राढ़ बंगाल क्षेत्र में भाजपा के जनाधार को मजबूत करने के उद्देश्य से तय किया गया है।
रात में पहुंचेंगे अंडाल, फिर शुरू होगा प्रचार
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री शनिवार रात अंडाल एयरपोर्ट पहुंचेंगे और दुर्गापुर में रात्रि विश्राम करेंगे। इसके बाद रविवार सुबह वह बांकुड़ा जिले के बारजोड़ा पहुंचेंगे, जहां लगभग 11 बजे पहली जनसभा होगी।इसके बाद वे पुरुलिया जाएंगे, जहां बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र में दोपहर 12:45 बजे दूसरी सभा निर्धारित है।
झाड़ग्राम और मेदिनीपुर में भी रैलियां
तीसरी सभा झाड़ग्राम में दोपहर 2:45 बजे होगी, जबकि चौथी और अंतिम सभा मेदिनीपुर में आयोजित की जाएगी। इन सभी सभाओं में भारी भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है।
आदिवासी मतदाताओं पर विशेष रणनीति
भाजपा ने इस पूरे दौरे को विशेष रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जंगलमहल क्षेत्र में आदिवासी समुदाय का प्रभाव निर्णायक माना जाता है, इसलिए भाजपा इस वर्ग को साधने की पूरी कोशिश कर रही है।
बेलूर मठ और रोड शो भी प्रस्तावित
इसके अलावा प्रधानमंत्री 23 अप्रैल को Belur Math का दौरा करेंगे और वहां से शालकिया तक रोड शो करेंगे। उसी दिन कृष्णानगर में भी उनकी एक जनसभा प्रस्तावित है।
चुनाव प्रचार में तेजी, मुकाबला कड़ा
पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही दिन शेष हैं, ऐसे में पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंच गया है। भाजपा ने पूरे राज्य में प्रधानमंत्री मोदी को अपना प्रमुख चेहरा बनाकर मैदान में उतारा है। पार्टी “Sonear Bangla Campaign” के नारे के साथ मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलमहल में होने वाली ये सभाएं चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं और आदिवासी वोट बैंक पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।









