नई दिल्ली/न्यूयॉर्क,अंग भारत। फरहान अख्तर की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में शानदार प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। 28 से 31 मई तक आयोजित इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में ‘बूंग’ ने तीन प्रमुख पुरस्कार जीतकर सबसे बड़ी विजेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।फिल्म को इस समारोह में ‘सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फिल्म’ का पुरस्कार मिला, जबकि इसकी निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी को ‘सर्वश्रेष्ठ निर्देशक’ के सम्मान से नवाजा गया। वहीं फिल्म के बाल कलाकार गुगुन किपगेन ने ‘सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार’ का पुरस्कार जीतकर विशेष सराहना हासिल की। इस उपलब्धि के बाद भारतीय सिनेमा, विशेषकर क्षेत्रीय फिल्मों के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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15 भाषाओं की फिल्मों के बीच चमकी ‘बूंग’
न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में इस वर्ष 15 अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों का प्रदर्शन किया गया था। कड़े मुकाबले के बीच मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ का तीन पुरस्कार जीतना इसकी मजबूत कहानी, संवेदनशील निर्देशन और प्रभावशाली अभिनय का प्रमाण माना जा रहा है।फेस्टिवल में शामिल जूरी और दर्शकों ने फिल्म की भावनात्मक गहराई और मानवीय पहलुओं को खास तौर पर सराहा। ‘बूंग’ की सफलता ने यह साबित किया है कि भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा भी वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान बना रहा है।
मणिपुर की पृष्ठभूमि में बुनी गई भावनात्मक कहानी
‘बूंग’ एक संवेदनशील कहानी पर आधारित फिल्म है, जो मणिपुर की घाटी में रहने वाले एक मासूम लड़के के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे वह अपनी मां के अकेलेपन और परिवार की कठिन परिस्थितियों को देखकर अपने पिता को वापस लाने का प्रयास करता है।इस यात्रा में उसे कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जो दर्शकों को गहराई से प्रभावित करते हैं। फिल्म का कथानक पारिवारिक संबंधों, मासूमियत और भावनात्मक संघर्षों को बेहद सादगी से प्रस्तुत करता है।
पहले भी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी है फिल्म
गौरतलब है कि ‘बूंग’ पहले ही ‘बाफ्टा 2026’ में ‘बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म’ का पुरस्कार जीत चुकी है। इसके बाद न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में मिली यह सफलता फिल्म की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को और मजबूत करती है।फिल्म की इस उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारतीय सिनेमा केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में भी वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।











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