Spirituality Desk: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का एक बेहद खास और विशिष्ट महत्व है। यह पावन व्रत भगवान शिव की भक्ति और उपासना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन देवों के देव महादेव अपने सच्चे भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है कि भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत का दिन सबसे उत्तम और सरल माध्यम होता है। ‘प्रदोष’ शब्द का गहरा अर्थ संध्या काल यानी सूर्यास्त का समय और रात्रि का प्रथम पहर होता है। चूंकि इस विशेष व्रत की मुख्य पूजा-अर्चना प्रदोष काल (शाम के समय) में ही संपन्न की जाती है, इसलिए इसे प्रदोष व्रत के नाम से पुकारा जाता है। यह व्रत भगवान शिव और जगत जननी माता पार्वती को पूरी तरह समर्पित है। इसी महत्ता के कारण हर महीने भक्त इसका इंतजार करते हैं, और इस साल जून 2026 में भी 12 और 27 जून को दो महत्वपूर्ण प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं।
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र चढ़ाना चाहिए। इसके अलावा, प्रदोष व्रत में “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और प्रदोष व्रत की कथा सुननी चाहिए।
पंडितों के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए इस व्रत को अत्यंत शुभ व महत्वपूर्ण माना गया है। इस व्रत के फलस्वरूप भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती भक्तों पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखते हैं। इस व्रत के पुण्यफल से व्यक्ति द्वारा अपने जीवन काल में किए गए पापों का अंत होता है। साथ ही सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है और वह सत्य के मार्ग पर अग्रसर होता है। भगवान शिव की आराधना को जीवन के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति के लिए भी लाभदायक माना गया है।
प्रदोष व्रत वह मार्ग है, जिसपर चलकर व्यक्ति अंत में जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्राप्त कर सकता है। इस व्रत के प्रभाव से जातक के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही जो व्यक्ति पूरी निष्ठा से इसका पालन करता है, उसकी मनोकामनाएं भी भगवान शिव पूर्ण करते हैं। इस व्रत से मिलने वाला पुण्यफल भी व्यक्ति के जीवन में सफलता के नए द्वार खोल देता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से दो गायों को दान करने के समान पुण्यफल प्राप्त होता है। इस सभी कारणों से प्रदोष व्रत को शुभ, पावन और कल्याणकारी माना जाता है। इस संसार में प्रदोष व्रत एक डोरी के समान है जो लोगों को भगवान शिव की भक्ति से जोड़ कर रखता है।










