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विश्व पर्यावरण दिवस पर नेताओं का संदेश, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिला बल

नई दिल्ली,अंग भारत। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गुरुवार को देशभर में पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रकृति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

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उपराष्ट्रपति ने बताया भारतीय संस्कृति का मूल संदेश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता सदियों से प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना को अपनाती रही है। उन्होंने प्राचीन तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल का उल्लेख करते हुए कहा कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और सभी जीवों की रक्षा आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।

संसद बन रही पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि संसद परिसर में पेपरलेस कार्यप्रणाली, सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध, हरित संसदीय भवन और स्वच्छ परिसर जैसी कई पहलें लागू की गई हैं, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिला समर्थन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन से निपटने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जनआंदोलन बताते हुए नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की।वहीं केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाला देश बन चुका है। उन्होंने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सौर ऊर्जा विस्तार और वनावरण वृद्धि को देश की बड़ी उपलब्धियां बताया।

केंद्रीय मंत्रियों ने दिया हरित भविष्य का संदेश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “पेड़ लगाना यानी जीवन लगाना है।” उन्होंने वृक्षारोपण को पर्यावरण संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए सभी नागरिकों से इस अभियान में भागीदारी निभाने का आग्रह किया।केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लेने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का छोटा प्रयास भी स्वच्छ और हरित भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

राज्यों में भी चले विशेष अभियान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ महाभियान के तहत राज्यव्यापी वृक्षारोपण कार्यक्रम की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने महर्षि चरक औषधि वन, स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना और आर्द्रभूमि संरक्षण जैसे प्रयासों का उल्लेख किया।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि राजधानी में मेगा प्लांटेशन ड्राइव और 18 नमो ऑक्सीजन पार्कों के उद्घाटन के माध्यम से हरित दिल्ली मिशन को नई गति दी जा रही है।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया, जबकि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने वृक्षारोपण और जल संरक्षण को सतत विकास की बुनियाद करार दिया।

विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व

विश्व पर्यावरण दिवस पहली बार 5 जून 1973 को मनाया गया था। इसकी शुरुआत 1972 में आयोजित स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई थी। तब से हर वर्ष यह दिवस पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

जनभागीदारी से ही संभव होगा पर्यावरण संरक्षण

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के माध्यम से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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