वाशिंगटन,अंग भारत। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए 14 सूत्रीय शांति समझौते के बाद प्रस्तावित तकनीकी वार्ताओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस फिलहाल स्विट्जरलैंड के लिए रवाना नहीं हुए हैं, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच अगले चरण की बातचीत होने की संभावना थी।व्हाइट हाउस के अनुसार वार्ता की रूपरेखा और यात्रा संबंधी व्यवस्थाएं अभी पूरी तरह तय नहीं हो सकी हैं, जिसके कारण वेंस का दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
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शांति समझौते के बाद आगे की बातचीत पर नजर
अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए समझौते में संघर्ष विराम, होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की बहाली और परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत का रास्ता खोलने जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। समझौते के बाद दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की वार्ताओं की तैयारी चल रही थी।हालांकि अब तक वार्ता का अंतिम कार्यक्रम तय नहीं हो पाया है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल किसी भी समय रवाना होने के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत की तारीख और स्वरूप पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य हुआ आवागमन
रिपोर्टों के अनुसार समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों और व्यावसायिक जहाजों का आवागमन सामान्य रूप से जारी है। वैश्विक ऊर्जा बाजार की दृष्टि से यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके खुलने से तेल आपूर्ति को राहत मिली है।
अमेरिकी सांसदों को दी गई जानकारी
ट्रंप प्रशासन ने समझौते को लेकर अमेरिकी कांग्रेस के प्रमुख नेताओं और विदेश मामलों से जुड़ी समितियों को भी जानकारी दी है। अधिकारियों ने समझौते की प्रमुख शर्तों और भविष्य की वार्ताओं की संभावित रूपरेखा पर सांसदों को ब्रीफ किया तथा उनके सवालों के जवाब दिए।
लेबनान की स्थिति से बढ़ी चिंता
इस बीच क्षेत्रीय हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। दक्षिणी लेबनान में जारी तनाव और इजराइल-हिजबुल्लाह के बीच बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि यही कारण तकनीकी वार्ताओं के समय और स्वरूप को प्रभावित कर रहा है।
आगे क्या?
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों पक्ष वार्ता जारी रखने की इच्छा जता रहे हैं, लेकिन तकनीकी स्तर की बातचीत कब शुरू होगी, इस पर स्पष्टता नहीं है। वेंस का दौरा टलने से प्रक्रिया में थोड़ी देरी जरूर हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता खुला हुआ माना जा रहा है।



































