जयपुर,अंग भारत। राजस्थान में प्री-मानसून की सक्रियता ने भीषण गर्मी के बाद लोगों को बड़ी राहत दी है। राज्य के करीब 16 जिलों में शुक्रवार को दर्ज की गई बारिश ने तपते रेगिस्तान के मिजाज को पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि, जहां एक ओर मेघ बरसे हैं, वहीं पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्से अब भी सूरज की तपिश झेलने को मजबूर हैं। यह प्री-मानसून गतिविधियां आने वाले मानसून के स्वागत का संकेत मानी जा रही हैं।
बारिश का हाल
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नागौर जिले का डेह क्षेत्र बारिश के मामले में सबसे आगे रहा, जहां 60 मिमी वर्षा मापी गई है। वहीं, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और भीलवाड़ा जैसे जिलों में भी अच्छी बारिश दर्ज हुई है, जिससे स्थानीय किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।
- नागौर (खींवसर): 40 मिमी
- भीलवाड़ा (करेड़ा): 35 मिमी
- प्रतापगढ़ (अरनोद): 32 मिमी
- चित्तौड़गढ़: 28 मिमी
- अजमेर (किशनगढ़): 18 मिमी
27 जिलों में अलर्ट
मौसम का मिजाज अभी भी अस्थिर है। विभाग ने राज्य के 27 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि आने वाले घंटों में भी तेज हवाओं के साथ कहीं-कहीं बिजली गिरने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की पूरी संभावना है। आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे आंधी के समय पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें और खुले में रहने के दौरान सावधानी बरतें।
पश्चिमी राजस्थान की स्थिति
हैरानी की बात यह है कि राज्य का एक हिस्सा जहां भीग रहा है, वहीं दूसरा हिस्सा अभी भी लू की चपेट में है। पश्चिमी राजस्थान के जिलों में बारिश की कमी के कारण पारा अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।
| स्थान | अधिकतम तापमान (डिग्री) |
|---|---|
| श्रीगंगानगर | 42.1 |
| चूरू | 41.5 |
| बीकानेर | 41.2 |
गर्मी बनाम बारिश
राजस्थान का भूगोल ही कुछ ऐसा है कि यहां मानसून का प्रभाव हर तरफ एक जैसा नहीं होता। पश्चिमी इलाकों, विशेषकर जैसलमेर और बाड़मेर में नमी का असर पहुंचने में समय लगता है। हालांकि, अगले तीन दिनों तक उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के जिलों में प्री-मानसून की गतिविधियां सक्रिय रहने की उम्मीद है, जिससे गर्मी का ग्राफ धीरे-धीरे नीचे आएगा।
खेती पर प्रभाव
यह बारिश खरीफ की फसलों की तैयारी में जुटे किसानों के लिए एक संजीवनी की तरह है। खेतों की जुताई के लिए नमी बेहद जरूरी है। जिन क्षेत्रों में एक इंच से अधिक बारिश हुई है, वहां अब किसान बुवाई की योजना बनाना शुरू कर सकते हैं। समय पर होने वाली यह प्री-मानसून बरसात मिट्टी में जल धारण क्षमता को भी बढ़ाती है, जो आने वाले मानसून के लिए फायदेमंद है।
सावधानी है जरूरी
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि तेज हवा के दौरान बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। घर के बाहर बिजली के उपकरणों से दूर रहें और बारिश के दौरान कच्चे मकानों या बड़े पेड़ों के नीचे न रुकें। प्रशासन ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है ताकि किसी भी तरह के नुकसान को कम किया जा सके। राजस्थान में जल्द ही मानसून की आधिकारिक दस्तक की उम्मीद जताई जा रही है, जो इस प्री-मानसून के बाद की स्थिति को और बेहतर बनाएगी।







