बांका, अंग भारत। मद्य निषेध अवर निरीक्षक पद के लिए आयोजित प्रारंभिक लिखित परीक्षा शनिवार को जिले के निर्धारित 10 परीक्षा केंद्रों पर बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुई। बांका जिला प्रशासन ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए कमर कस रखी थी, जिसका सीधा असर ज़मीनी स्तर पर भी दिखा। जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल के नेतृत्व में पूरी परीक्षा प्रक्रिया को न केवल सुरक्षा के घेरे में रखा गया, बल्कि हर छोटी गतिविधि पर प्रशासन की पैनी नज़र बनी रही। यह परीक्षा न केवल अभ्यर्थियों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण थी, बल्कि राज्य सरकार के पारदर्शी चयन प्रक्रिया के वादे को साबित करने का एक बड़ा मंच भी थी।
परीक्षा केंद्रों की सख्त सुरक्षा
परीक्षा के दिन बांका के सभी केंद्रों पर प्रवेश द्वार से लेकर परीक्षा कक्ष तक सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम थे। जिला प्रशासन की ओर से दंडाधिकारियों और पुलिस बल की भारी तैनाती की गई थी। हर केंद्र पर एक विशेष प्रोटोकॉल का पालन किया गया:
- प्रत्येक अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक और फोटोग्राफ मिलान सुनिश्चित किया गया।
- केंद्रों के बाहर धारा 144 जैसे नियमों का सख्ती से अनुपालन कराया गया।
- किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या मोबाइल फोन के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध था।
- महिला और पुरुष परीक्षार्थियों के लिए अलग-अलग तलाशी बूथ बनाए गए थे।
डीएम अंशुल अग्रवाल ने स्वयं केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने सीएमएस उच्च माध्यमिक विद्यालय शाहपुर और एमडीएन हाई स्कूल डुमरामा जैसे केंद्रों पर जाकर सीसीटीवी मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की। उनका स्पष्ट निर्देश था कि किसी भी हाल में नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा।
डीएम का सीधा हस्तक्षेप
निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी ने केवल फाइलों को नहीं देखा, बल्कि मौके पर मौजूद केंद्राधीक्षकों से संवाद भी किया। उन्होंने साफ कर दिया कि परीक्षा की सफलता का अर्थ केवल शांतिपूर्ण संपन्न होना नहीं, बल्कि शत-प्रतिशत निष्पक्षता होना है। उनके दौरे का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि परीक्षा में बैठने वाले हर योग्य छात्र को एक समान अवसर मिले। प्रशासनिक अधिकारियों ने केंद्रों के भीतर और बाहर की स्थितियों का निरंतर फीडबैक कंट्रोल रूम को भेजा, जिससे जिला मुख्यालय को पल-पल की अपडेट मिलती रही।
पारदर्शिता के कड़े मानक
इस बार की परीक्षा प्रक्रिया में प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई थी। गड़बड़ी की संभावनाओं को शून्य करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए थे:
| तैयारी का स्तर | उद्देश्य |
|---|---|
| सीसीटीवी कवरेज | हर गतिविधि की रिकॉर्डिंग और मॉनिटरिंग |
| पहचान सत्यापन | डमी परीक्षार्थियों को रोकने के लिए |
| वीक्षक रोटेशन | किसी भी मिलीभगत को रोकने हेतु |
प्रशासन का मानना है कि मद्य निषेध जैसे संवेदनशील विभाग में नियुक्ति के लिए ईमानदारी पहला पैमाना है। इसीलिए, अभ्यर्थियों को केंद्र में प्रवेश से पहले ही पूरी तरह से स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे कि वे कोई भी अनावश्यक सामग्री साथ न लाएं।
शांतिपूर्ण संपन्न प्रक्रिया
परीक्षा समाप्त होने के बाद जब परीक्षार्थी बाहर निकले, तो उनमें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संतुष्टि साफ देखी गई। जिले के सभी 10 केंद्रों से कहीं भी किसी अप्रिय घटना या कदाचार की सूचना नहीं मिली। प्रशासन की कड़ी निगरानी का परिणाम यह रहा कि परीक्षार्थियों ने भी पूरे धैर्य के साथ नियमों का पालन किया।
अंत में, जिला प्रशासन ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया को एक सफल आयोजन के रूप में देखा। बांका के उन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की मेहनत रंग लाई, जिन्होंने सुबह से ही केंद्रों पर मोर्चा संभाल रखा था। इस परीक्षा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यदि जिला प्रशासन दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाए, तो परीक्षाओं का संचालन पूरी तरह से नकलविहीन और सुव्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है। अब अभ्यर्थियों की नजरें अपनी मेहनत के अंतिम परिणाम पर टिकी हैं।








