नई दिल्ली,अंग भारत। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के कथित यौन शोषण मामले में भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत दी है। शनिवार (3 अगस्त 2024) को कोर्ट ने इस चर्चित और संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह और संघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर दोनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने और सबूतों को परखने के बाद यह अहम फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद देश की खेल राजनीति और कानूनी गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला महीनों तक सड़क से लेकर अदालत तक छाया रहा था।
कोर्ट का बड़ा फैसला
अदालत ने इस मामले पर गहन विचार-विमर्श के बाद बीते 2 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शनिवार को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने फैसला सुनाते हुए साफ किया कि पेश किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ दोष साबित नहीं होता है। कानूनी जानकारों का मानना है कि पुलिस की चार्जशीट में विसंगतियां और गवाहों के बयानों में आपसी तालमेल की कमी ही बचाव पक्ष के पक्ष में गई। आखिरकार इसी तकनीकी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश जारी कर दिया। इस निर्णय से लंबे समय से चल रहे इस बड़े कानूनी विवाद को एक नया मोड़ मिला है।
धाराएं और कानूनी पेच
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में लंबी जांच-पड़ताल के बाद 15 जून 2023 को कोर्ट में अपनी चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इन धाराओं को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखा जा सकता है:
| आईपीसी (IPC) धारा | कानूनी प्रावधान और अर्थ |
|---|---|
| धारा 354 | महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना। |
| धारा 354ए | यौन उत्पीड़न और अवांछित शारीरिक संपर्क बनाना या ऐसी मांग करना। |
| धारा 354डी | किसी महिला का पीछा करना या उसकी मर्जी के बिना उससे संपर्क बनाने की कोशिश करना। |
| धारा 506 (1) | किसी को आपराधिक रूप से डराना या जान-माल की धमकी देना। |
बचाव पक्ष के तर्क
सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के वकील राजीव मोहन ने अदालत के सामने कई ठोस कानूनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पहले ही एक विशेष ओवरसाइट कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने अपनी जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली पुलिस कमिश्नर को सौंपी थी। वकील राजीव मोहन ने इस बात पर जोर दिया कि इस पूरे विरोध प्रदर्शन की शुरुआत बेहद सुनियोजित तरीके से 18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर की गई थी।
राजीव मोहन ने बृजभूषण शरण सिंह की तरफ से एक विशेष याचिका भी लगाई थी। इसमें दावा किया गया था कि जिस कथित घटना की तारीख (7 सितंबर 2022) बताई जा रही है, उस दिन बृजभूषण भारत में थे ही नहीं, बल्कि विदेश यात्रा पर थे। उन्होंने अदालत से दिल्ली पुलिस को इस विदेशी दौरे की जांच करने का निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इस याचिका को कानूनी आधार पर स्वीकार नहीं किया था। इससे पहले कोर्ट ने 20 जुलाई 2023 को दोनों आरोपियों को नियमित जमानत दे दी थी।
पीड़ित पक्ष की जंग
महिला पहलवानों का पक्ष रख रही वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने आरोपियों के हर तर्क का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने सरकार द्वारा बनाई गई ओवरसाइट कमेटी के गठन की वैधता पर ही बड़ा कानूनी सवाल उठा दिया।
“खेल मंत्रालय द्वारा गठित ओवरसाइट कमेटी कानून के स्थापित नियमों के तहत नहीं बनाई गई थी। इसलिए इसकी रिपोर्ट को अंतिम या पूरी तरह सत्य नहीं माना जा सकता। आरोपियों पर पुलिस चार्जशीट में दर्ज गंभीर धाराओं के तहत ही पूरा मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए।”
– रेबेका जॉन, वरिष्ठ वकील
रेबेका जॉन ने मांग की थी कि पुलिस ने गवाहों और सबूतों के आधार पर जो चार्जशीट तैयार की है, वह आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त है, इसलिए कानूनी कार्यवाही को बिना किसी ढिलाई के आगे बढ़ाया जाए।
मामले का पूरा घटनाक्रम
इस पूरे घटनाक्रम के कानूनी पड़ावों को समझने के लिए इसकी मुख्य तारीखों पर नजर डालना जरूरी है:
- 18 जनवरी 2023: महिला पहलवानों ने पहली बार दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना शुरू कर कुश्ती संघ में तानाशाही और शोषण के खिलाफ आवाज उठाई।
- 15 जून 2023: दिल्ली पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट पेश की, जिसमें आईपीसी की धारा 354, 354ए, 354डी और 506(1) शामिल थीं।
- 7 जुलाई 2023: राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर औपचारिक रूप से संज्ञान लिया।
- 20 जुलाई 2023: कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को नियमित जमानत मंजूर की।
- 10 मई 2024: अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने का आदेश दिया।
- 2 जुलाई 2024: दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
- 3 अगस्त 2024: एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
खेल और राजनीतिक असर
इस अदालती फैसले का सीधा असर केवल बृजभूषण शरण सिंह के राजनीतिक जीवन पर ही नहीं, बल्कि भारतीय खेल प्रशासन पर भी पड़ेगा। यह पूरा विवाद सिर्फ एक अदालती मुकदमा नहीं था, बल्कि इसने खेल संघों के भीतर खिलाड़ियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर एक नई राष्ट्रीय बहस को जन्म दिया था। इस फैसले के बाद कुश्ती संघ (WFI) के भीतर नए समीकरण बनते दिख सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, पीड़ित महिला पहलवानों के पास अभी भी इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर करने का कानूनी अधिकार सुरक्षित है, जिससे यह कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रह सकती है।








