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बासुकीनाथ धाम में पहली सोमवारी पर आस्था का महासंगम, लाखों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

दुमका, 03 अगस्त (हि.स.)। श्रावण मास की पहली सोमवारी के अवसर पर बाबा बासुकीनाथ धाम में आस्था का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जहां लाखों की संख्या में शिवभक्तों ने गंगाजल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। पवित्र श्रावण माह की इस पहली सोमवारी को लेकर श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह था और पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गुंजायमान रहा। दूर-दराज से आए कांवड़ियों ने सुल्तानगंज से गंगाजल उठाया और बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के दर्शन के बाद बासुकीनाथ पहुंचकर अपनी यात्रा को पूर्ण किया।

आस्था का महासंगम

सावन की पहली सोमवारी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की पूजा करने और जलाभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बासुकीनाथ धाम में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि शिव भक्तों के लिए यह स्थान कितना महत्व रखता है। सुल्तानगंज से जल भरकर चले कांवरियों का जत्था जैसे ही बासुकीनाथ की सीमा में प्रवेश करता है, पूरी फिजा शिवमय हो जाती है। लंबी कतारों के बावजूद भक्तों के चेहरों पर थकान नहीं, बल्कि बाबा के दर्शन की तीव्र अभिलाषा साफ झलक रही थी।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। दुमका के पुलिस अधीक्षक पीताम्बर सिंह खेरवार खुद स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सुबह से ही वे और अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कंट्रोल रूम के जरिए मंदिर परिसर और कांवड़ पथ की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई है ताकि भक्त अनुशासित तरीके से जलार्पण कर सकें।

  • मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक विशेष निगरानी।
  • कांवरिया पथ पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती।
  • सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर सीधी नजर।
  • भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष वॉलिंटियर्स की मदद।

प्रशासनिक सक्रियता

जिला उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि पहली सोमवारी को देखते हुए जिले के सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने बताया, “हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। साफ-सफाई से लेकर पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं तक, हर चीज का बारीकी से ध्यान रखा जा रहा है।”

पुलिस अधीक्षक पीताम्बर सिंह खेरवार ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर जानकारी देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से कांवरियों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए पुलिस कर्मियों को चौबीस घंटे मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है।

सावन और बासुकीनाथ का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, बाबा बासुकीनाथ धाम को ‘फुलेश्वरी’ या बासुकीनाथ के रूप में जाना जाता है। यहां के शिवलिंग की महिमा अपरंपार है। बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ धाम की यात्रा को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। भक्त मानते हैं कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद यदि बासुकीनाथ के दर्शन न किए जाएं, तो शिव यात्रा अधूरी रहती है।

“पहली सोमवारी पर उमड़ने वाली यह भीड़ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा और अटूट विश्वास की एक जीवित मिसाल है।”

भीड़ के बावजूद मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन के तालमेल ने दर्शन प्रक्रिया को सुगम बनाया। भक्त घंटों कतार में खड़े होने के बाद भी पूरी श्रद्धा के साथ अपनी बारी का इंतजार करते रहे। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, भक्तों की संख्या बढ़ती गई, लेकिन सुरक्षाकर्मियों की तत्परता से कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। सावन की यह पहली सोमवारी न केवल शिव भक्तों के लिए एक यादगार अनुभव रही, बल्कि जिले के प्रशासनिक प्रबंधन के लिए भी एक बड़ी परीक्षा साबित हुई, जिसमें प्रशासन सफल रहा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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