नई दिल्ली, अंग भारत। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड में राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में हो रही कथित अनियमितताओं और धांधली को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर कड़े प्रहार किए हैं। निशिकांत दुबे का स्पष्ट आरोप है कि पिछले सात-आठ वर्षों से झारखंड में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि राज्य के योग्य और मेधावी युवा रोजगार से वंचित रह गए हैं। वे आज हताशा में सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं।
भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार
सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को संसद परिसर में पत्रकारों के सामने झारखंड के छात्रों की पीड़ा को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि राज्य के छात्रों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। निशिकांत दुबे के मुताबिक, राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का नामोनिशान नहीं बचा है। वर्षों से चल रहे इस भ्रष्टाचार ने युवाओं के मनोबल को तोड़ दिया है, क्योंकि वे सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं और अंत में उन्हें धांधली की भेंट चढ़ना पड़ता है।
आयोग पर गंभीर आरोप
निशिकांत दुबे ने अपनी बात को पुख्ता करते हुए आयोग के सदस्यों की नियुक्तियों पर सीधा सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेपीएससी और जेएसएससी में जो नियुक्तियां की गई हैं, उनमें योग्यता के बजाय कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रभाव को प्राथमिकता दी गई है। इसके चलते भर्ती प्रक्रिया की पूरी निष्पक्षता संदिग्ध हो गई है। उनके अनुसार, जब चयनकर्ता ही राजनीतिक दबाव में नियुक्त होंगे, तो परीक्षाओं की शुचिता की उम्मीद करना बेमानी है।
छात्रों का निरंतर संघर्ष
- झारखंड के युवा जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में बार-बार हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
- लगातार प्रश्नपत्र लीक होने की खबरें राज्य के छात्रों के बीच गहरा अविश्वास पैदा कर रही हैं।
- सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों ने समय-समय पर पारदर्शिता की मांग को लेकर व्यापक प्रदर्शन किए हैं।
- राज्य सरकार और संबंधित भर्ती बोर्ड इन शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय केवल आश्वासन दे रहे हैं।
भविष्य पर संकट
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं का इतिहास हाल के वर्षों में विवादों से भरा रहा है। विशेष रूप से संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और अन्य राज्य स्तरीय भर्ती प्रक्रियाओं में प्रश्नपत्र लीक और परिणामों में हेराफेरी के आरोपों ने छात्रों के सपनों को चकनाचूर किया है। निशिकांत दुबे का मानना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं लाई गई, तो झारखंड की आने वाली पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन तमाम अनियमितताओं की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व तत्वों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
विपक्ष की घेराबंदी
केवल भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य विपक्षी दलों ने भी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर हेमंत सोरेन सरकार को निशाने पर लिया है। यह मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है। छात्रों का एक बड़ा वर्ग अब सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है। जेएसएससी और जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे ये सवाल केवल एक-दो परीक्षाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को हिलाकर रख देने वाले हैं।
सांसद निशिकांत दुबे के अनुसार, “युवाओं का धैर्य अब जवाब दे चुका है। सरकार को यह समझना होगा कि भाई-भतीजावाद से राज्य की मेधा को रोका नहीं जा सकता, बल्कि यह विकास की गति को पूरी तरह अवरुद्ध कर रहा है।”
समाधान की राह
झारखंड में छात्रों के बढ़ते आंदोलन को शांत करने और युवाओं का भरोसा जीतने के लिए सरकार को तत्काल कुछ सख्त कदम उठाने होंगे। इसमें भर्ती प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक उपाय और परीक्षाओं में बाहरी विशेषज्ञों की देखरेख अनिवार्य है। केवल जांच के नाम पर खानापूर्ति करने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि जब तक युवाओं को यह विश्वास नहीं होगा कि परीक्षा निष्पक्ष है, तब तक आंदोलन की यह आग ठंडी होने वाली नहीं है। राज्य के भविष्य के लिए यह आवश्यक है कि भर्ती बोर्डों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त किया जाए।








