अमरपुर/बांका/अंगभारत। शारदीय नवरात्र को लेकर अमरपुर शहर में दुर्गा पूजा की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। शहर के बड़ी दुर्गा मंदिर एवं गोला चौक स्थित छोटी दुर्गा मंदिर में दशकों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी मां दुर्गा की पूजा वैष्णवी पद्धति से की जाएगी। नवरात्र शुरू होते ही पूरा शहर देवी स्तुति और धार्मिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय हो उठेगा। पूजा को लेकर पूजा समितियों के सदस्यों के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है।अमरपुर की दुर्गा पूजा की अपनी अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। वर्षों से यहां वैष्णवी पद्धति से मां दुर्गा की आराधना होती आ रही है। पूजा के दौरान शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। खासकर विजया दशमी के बाद निकलने वाली मां दुर्गा की विसर्जन यात्रा लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती है। विसर्जन यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और शहर में घंटों तक धार्मिक एवं उत्सवी माहौल बना रहता है।पूजा समिति के अध्यक्ष प्रदीप कुमार उर्फ पप्पू साह ने बताया कि इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन और विसर्जन दोनों शुभ मुहूर्त में होने वाला है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मां का आगमन हाथी पर होने का संयोग बन रहा है। वहीं विसर्जन भी हाथी पर ही होने की बात कही गई है। कई वर्षों बाद इस तरह का संयोग बनने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। उन्होंने बताया कि पूजा को लेकर समिति की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं और सभी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।अमरपुर की दुर्गा पूजा की खासियत यह भी है कि मां दुर्गा की प्रतिमा निर्माण की परंपरा कई वर्षों से एक ही परिवार से जुड़ी हुई है। प्रतिमा निर्माण का कार्य वर्षों तक दिवंगत जगदीश साह करते रहे। अब उनके वंशज अरविंद साह और सच्चिदानंद साह इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। दोनों कलाकार मां दुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। प्रतिमा निर्माण स्थल पर दिन-रात काम चल रहा है। प्रतिमा को आकर्षक और भव्य रूप देने के लिए कलाकार बारीकी से कार्य कर रहे हैं।पूजा समिति के अध्यक्ष ने बताया कि पूजा के दौरान प्रतिमा बनाने की जिम्मेदारी भी जगदीश साह के वंशजों द्वारा निभाई जाती है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा के कारण पूजा से स्थानीय लोगों की भावनाएं गहराई से जुड़ी हुई हैं। यही वजह है कि पूजा की तैयारियों में शहर के लोग भी बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं।इस वर्ष 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र के पहले दिन से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। पूजा समिति द्वारा मंदिर परिसर की साफ सफाई, सजावट, प्रकाश व्यवस्था और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। नवरात्र के दौरान प्रतिदिन विधि-विधान के साथ मां की पूजा-अर्चना की जाएगी।पूजा को लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक उत्साह का माहौल बनने लगा है। शाम होते ही मंदिरों के आसपास श्रद्धालुओं की चहल-पहल बढ़ रही है। दुकानदार भी पूजा को लेकर अपनी तैयारियों में जुटे हैं। पूजा के दौरान सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर भी समिति द्वारा आवश्यक स्तर पर व्यवस्था की जा रही है,पूजा समिति की ओर से दशहरा के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। 21 अक्टूबर को शहर के सार्वजनिक पुस्तकालय परिसर में भरत मिलाप के साथ विशाल रावण वध कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर लोगों में अभी से उत्सुकता है। रावण वध देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।अगले दिन यानी 22 अक्टूबर की सुबह मां दुर्गा की प्रतिमा का विधि विधान के साथ विसर्जन किया जाएगा। विसर्जन यात्रा अमरपुर की दुर्गा पूजा का प्रमुख आकर्षण मानी जाती है। श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति के साथ मां को विदाई देंगे। शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरने वाली विसर्जन यात्रा के दौरान भक्तिमय वातावरण देखने को मिलेगा।पूजा समिति के अध्यक्ष प्रदीप कुमार उर्फ पप्पू साह ने श्रद्धालुओं से पूजा एवं विसर्जन कार्यक्रम में शांतिपूर्ण तरीके से भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की पूजा अमरपुर की वर्षों पुरानी परंपरा और आस्था से जुड़ी है। इस परंपरा को बनाए रखने के लिए समिति के साथ शहरवासियों का सहयोग जरूरी है। नवरात्र को लेकर इन दिनों अमरपुर शहर पूरी तरह से भक्तिमय रंग में रंगता नजर आ रहा है।







