बिहार,अंग भारत| बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा घोषित मैट्रिक परीक्षा 2026 के परिणाम ने बांका जिले को गौरवांवित कर दिया है। जिले के रजौन प्रखंड के सिंहनान पंचायत स्थित गोपालपुर गांव की रहने वाली पुष्पांजलि कुमारी ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है।
492 अंक लाकर राज्य में हासिल किया पहला स्थान
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा जारी परिणाम के अनुसार, सिमुलतला आवासीय विद्यालय, जमुई की छात्रा पुष्पांजलि ने 500 में से 492 अंक (98.4 प्रतिशत) प्राप्त किए। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने राज्यभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
साधारण परिवार से निकलकर बनी प्रेरणा
पुष्पांजलि एक साधारण ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता लालमोहन शर्मा रजौन के मध्य विद्यालय भगवानपुर में शिक्षक हैं, जबकि माता सिंधु देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार में शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी गई, जिसका परिणाम आज पूरे राज्य के सामने है।
घर में तीन बहनों और एक भाई में सबसे छोटी पुष्पांजलि ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया। उनकी एक बहन जीएनएम कर चुकी हैं, दूसरी बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि भाई इंजीनियरिंग की तैयारी में जुटे हैं।
समझकर पढ़ाई बनी सफलता की कुंजी
अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए पुष्पांजलि ने इसका श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी रटकर पढ़ाई नहीं की, बल्कि हर विषय को समझने पर जोर दिया। नियमित अध्ययन, अनुशासन और आत्मविश्वास उनकी सफलता के मुख्य आधार रहे।
गांव में जश्न, बधाई देने वालों की लगी कतार
रविवार को जैसे ही परिणाम घोषित हुआ और पुष्पांजलि के टॉपर बनने की खबर गांव पहुंची, गोपालपुर में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया और लोगों ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया।
भविष्य में समाज सेवा का सपना
पुष्पांजलि ने अपने भविष्य को लेकर कहा कि वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहती हैं। उनकी इस सफलता ने न केवल बांका बल्कि पूरे क्षेत्र के छात्रों के लिए प्रेरणा का काम किया है।स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने भी उनकी इस उपलब्धि की सराहना की और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उनका मानना है कि पुष्पांजलि की यह सफलता हजारों छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।पुष्पांजलि की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादे और कड़ी मेहनत के सामने संसाधनों की कमी भी बाधा नहीं बनती।









