पटना,अंग भारत। बिहार में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के भविष्य को आकार देने की दिशा में राज्य सरकार ने अब कमर कस ली है। हाल ही में पटना के ‘संकल्प’ सभागार में उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने प्रदेश की ऊर्जा रणनीति को एक नई दिशा दी है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और सौर ऊर्जा, हरित ऊर्जा एवं ग्रीन हाइड्रोजन जैसे भविष्य के संसाधनों को धरातल पर उतारना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सौर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अब किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और केंद्र-राज्य समन्वय के साथ योजनाओं को तीव्र गति दी जाएगी।
पीएम सूर्य घर योजना
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को बिहार में एक जन-आंदोलन बनाने की तैयारी है। उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि योजना के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए। यह केवल एक सरकारी सब्सिडी वाली योजना नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के बिजली बिल को शून्य करने का एक सशक्त माध्यम है।
- आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह से पेपरलेस और सरल बनाना।
- सोलर पैनल लगाने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम शुरू करना।
- योजना के लाभार्थियों को समय पर सब्सिडी का भुगतान सुनिश्चित करना।
- हर घर तक इस योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर कैंप लगाना।
किसानों के लिए सिंचाई
बिहार की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए ‘पीएम-कुसुम योजना’ गेम-चेंजर साबित हो सकती है। डीजल आधारित पंपों पर निर्भरता कम करके किसान अब अपनी लागत में बड़ी बचत कर सकेंगे। बैठक में चर्चा हुई कि कैसे सौर पंपों के माध्यम से खेतों तक बिजली पहुंचाई जाए।
इससे न केवल सिंचाई आसान होगी, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी। सरकार उन इलाकों को चिन्हित कर रही है जहां ग्रिड बिजली पहुंचना मुश्किल है, ताकि वहां सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप सेट प्राथमिकता के आधार पर लगाए जा सकें।
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स
बिहार में जमीन की उपलब्धता को देखते हुए, जलाशयों और तालाबों की सतह का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करना एक दूरदर्शी कदम है। फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ये न केवल बिजली पैदा करते हैं, बल्कि जल वाष्पीकरण को रोककर जल संरक्षण में भी मदद करते हैं।
“फ्लोटिंग सोलर तकनीक बिहार के विशाल जल स्रोतों के लिए वरदान साबित होगी। यह कम जगह में अधिक ऊर्जा उत्पादन का बेहतरीन विकल्प है।”
ग्रीन हाइड्रोजन नीति
दुनिया भर में ऊर्जा का अगला बड़ा पड़ाव ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ है। बिहार सरकार ने भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को भांपते हुए इस क्षेत्र में अपनी नीति बनाने पर विचार शुरू कर दिया है। यह कदम राज्य को भविष्य के उद्योगों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बनाएगा।
ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए पानी और नवीकरणीय बिजली की आवश्यकता होती है, जो बिहार के भौगोलिक संसाधनों के अनुकूल है। इससे राज्य में नए निवेश के अवसर पैदा होंगे और युवाओं के लिए हरित रोजगार (Green Jobs) के द्वार खुलेंगे।
निजी निवेश बढ़ाना
अकेले सरकारी प्रयासों से नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्यों को पाना कठिन है, इसीलिए निजी निवेशकों को आकर्षित करना सरकार की प्राथमिकता है। उप-मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा दिया जाएगा।
पारदर्शी नीतियों और सरल नियमों के जरिए सरकार चाहती है कि देश की बड़ी ऊर्जा कंपनियां बिहार में बड़े पैमाने पर सोलर पार्क स्थापित करें। इससे राज्य का राजस्व भी बढ़ेगा और बुनियादी ढांचे का विकास होगा।
सौर क्षमता आकलन
योजनाओं को सफल बनाने के लिए वैज्ञानिक डेटा का होना अनिवार्य है। राज्य सरकार अब पूरे प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता का सटीक आकलन करने जा रही है।
| क्षेत्र | सौर ऊर्जा की संभावना |
|---|---|
| उत्तर बिहार | अधिक (मैदानी इलाका) |
| दक्षिण बिहार | उच्च (औद्योगिक संभावना) |
| सीमांचल | मध्यम |
इस आकलन के बाद, सरकार उन क्षेत्रों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करेगी जहां सौर विकिरण (Solar Irradiation) की मात्रा सबसे अधिक है। यह डेटा आधारित दृष्टिकोण भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत नींव का काम करेगा। बिहार का लक्ष्य अब केवल बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि एक हरित राज्य बनने की ओर अग्रसर होना है।







