फुल्लीडुमर/बांका/अंग भारत| बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड के तीनमुंडा गांव में एक राजमिस्त्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उपजा ‘डायन’ का विवाद हिंसक रूप ले चुका है। मृतक नरेश राय की मृत्यु के बाद उपजी अफवाहों ने गांव में सांप्रदायिक और सामाजिक सौहार्द को तार-तार कर दिया, जिसके कारण स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि प्रशासन को भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। इस घटना ने एक बार फिर अंधविश्वास और ग्रामीण समाज में गहराई तक पैठी कुरुतियों की कड़वी सच्चाई को सबके सामने ला खड़ा किया है।
मौत का घटनाक्रम
40 वर्षीय नरेश राय एक कुशल राजमिस्त्री थे। वे गांव के ही निवासी बिनेसर साह के घर निर्माण कार्य में लगे थे। करीब आठ दिन पहले कार्यस्थल पर ही अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने इसे सामान्य बीमारी समझकर पहले बांका सदर अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन हालत में सुधार न होने पर उन्हें भागलपुर के मायागंज रेफर कर दिया गया। दुर्भाग्यवश, घर लौटने के बाद उनकी हालत और अधिक नाजुक हो गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद अंत ने गांव में अनहोनी की चर्चाओं को हवा दे दी।
अंधविश्वास की जड़ें
चिकित्सकीय इलाज के बाद भी जब नरेश राय की स्थिति नहीं सुधरी, तो परिजनों ने पारंपरिक ओझा-गुनी का सहारा लेने का निर्णय लिया। गेड़ाटीकर गांव से तांत्रिक सरयूग पुजहार को बुलाया गया। यहीं से सारा विवाद शुरू हुआ। तांत्रिक ने रहस्यमयी दावे करते हुए एक महिला, सरस्वती देवी का नाम उछाल दिया। बिना किसी ठोस आधार के महिला पर ‘डायन’ होने का आरोप लगाकर उसे सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया गया।
- बिना सबूत के किसी पर भी डायन का आरोप लगाना कानूनन अपराध है।
- अंधविश्वास के कारण ग्रामीण समाज में आपसी रंजिशें बढ़ रही हैं।
- तांत्रिक और ओझाओं द्वारा दी जाने वाली भ्रामक जानकारी कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है।
हिंसक टकराव की स्थिति
जैसे ही सरस्वती देवी पर आरोप लगे, गांव दो गुटों में बंट गया। एक तरफ मृतक के परिजन थे, तो दूसरी तरफ आरोपी महिला का पक्ष। देखते ही देखते बहसबाजी ने हाथापाई का रूप ले लिया। गांव में तनाव की आग इतनी तेजी से फैली कि शांति व्यवस्था खतरे में पड़ गई। सूचना मिलते ही फुल्लीडुमर थानाध्यक्ष गुलशन कुमार, बीडीओ अमित प्रताप सिंह और सीओ मनोज कुमार की टीम ने मोर्चा संभाला। प्रशासन की तत्परता ही थी कि किसी बड़ी अनहोनी को समय रहते रोक लिया गया।
प्रशासनिक कार्रवाई और स्थिति
एसडीओ और एसडीपीओ की उपस्थिति में शव को पोस्टमार्टम के लिए बांका भेजा गया ताकि मौत के असली कारणों का पता चल सके। फिलहाल गांव में शांति है, लेकिन एहतियातन पुलिस पिकेट तैनात कर दी गई है। जिला प्रशासन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने या कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
“अंधविश्वास का कोई इलाज नहीं है, लेकिन कानून का डंडा इसे रोकने में सक्षम है। ग्रामीणों से अपील है कि वे किसी भी अनहोनी के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं और डायन जैसी कुप्रथाओं को समाज से मिटाएं।” – स्थानीय प्रशासन का रुख।
निष्कर्ष: आगे की राह
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। एक मेहनतकश मजदूर की मौत का उपयोग निजी रंजिश निकालने के लिए करना शर्मनाक है। डायन विरोधी कानून (डायन प्रतिषेध अधिनियम) होने के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की भारी कमी है। हमें यह समझने की जरूरत है कि मौत एक प्राकृतिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इसे डायन-प्रेत से जोड़ना न केवल अपराध है, बल्कि एक निरपराध व्यक्ति के जीवन को भी खतरे में डालना है। अब समय आ गया है कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से इन कुरीतियों को जड़ से उखाड़ा जाए।