ग्लासगो,अंग भारत। राष्ट्रमंडल खेल 2026 के दूसरे दिन का खेल समाप्त होने के साथ ही पदक तालिका की तस्वीर साफ होने लगी है। ऑस्ट्रेलिया ने कुल 12 पदकों के साथ अपनी बादशाहत कायम रखी है और वह सूची में सबसे ऊपर है। भारत के लिए भी दूसरे दिन का खेल काफी राहत भरा रहा। पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुष हैवीवेट वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया और इसी के साथ भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपना खाता खोल लिया। वर्तमान में भारत पदक तालिका में नौवें स्थान पर मौजूद है और आगे के दिनों में कई अन्य स्पर्धाओं से पदक की उम्मीदें बरकरार हैं।
ऑस्ट्रेलिया का वर्चस्व
खेलों की शुरुआत से ही ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। शुक्रवार को उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाते हुए 5 स्वर्ण, 2 रजत और 5 कांस्य पदक अपनी झोली में डाले। ऑस्ट्रेलियाई एथलीटों का यह प्रदर्शन उनके मजबूत खेल बुनियादी ढांचे और ट्रेनिंग की गुणवत्ता को दर्शाता है। वे न केवल व्यक्तिगत स्पर्धाओं में बल्कि सामूहिक खेलों में भी लगातार बढ़त बनाए हुए हैं।
नाइजीरिया की शानदार वापसी
पदक तालिका में नाइजीरिया का दूसरा स्थान हैरान करने वाला है, लेकिन उनके एथलीटों ने साबित कर दिया है कि वे कड़ी मेहनत के दम पर किसी भी देश को चुनौती दे सकते हैं। विशेष रूप से पैरा पावरलिफ्टिंग में नाइजीरिया का दबदबा देखने लायक रहा। उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग की दो अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर अपने देश का मान बढ़ाया है। कुल 6 पदकों के साथ वे फिलहाल मजबूती से दूसरे पायदान पर टिके हुए हैं।
स्कॉटलैंड और इंग्लैंड
मेजबान स्कॉटलैंड का प्रदर्शन भी काफी प्रभावशाली रहा है। अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेलते हुए स्कॉटलैंड ने अब तक 2 स्वर्ण और 2 रजत पदक के साथ कुल 4 पदक जीते हैं। वहीं इंग्लैंड की स्थिति थोड़ी अलग है। हालांकि उन्होंने कुल 7 पदक जीत लिए हैं, लेकिन उनमें से केवल एक स्वर्ण होने के कारण उन्हें तालिका में चौथे स्थान से संतोष करना पड़ रहा है। स्वर्ण पदक की कमी अक्सर देशों की रैंकिंग को नीचे धकेल देती है, जिसका खामियाजा इंग्लैंड को भुगतना पड़ रहा है।
भारत के लिए उम्मीदें
भारत ने दूसरे दिन अपना पहला पदक जीत लिया है, जो किसी भी बड़े टूर्नामेंट में लय हासिल करने के लिए बहुत जरूरी होता है। झंडू कुमार का कांस्य पदक भारतीय दल के लिए मनोबल बढ़ाने वाला रहा। पदक तालिका में 9वें स्थान पर होना एक शुरुआती कदम है। अभी कई प्रमुख खेल जैसे एथलेटिक्स, कुश्ती और शूटिंग के मुकाबले होने बाकी हैं, जहाँ भारत परंपरागत रूप से मजबूत रहा है।
तालिका का अवलोकन
| स्थान | देश | कुल पदक |
|---|---|---|
| 1 | ऑस्ट्रेलिया | 12 |
| 2 | नाइजीरिया | 6 |
| 3 | स्कॉटलैंड | 4 |
| 4 | इंग्लैंड | 7 |
| 9 | भारत | 1 |
पैरा एथलीटों का प्रदर्शन
इस बार के राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा एथलीटों का महत्व काफी बढ़ गया है। झंडू कुमार की उपलब्धि यह साबित करती है कि भारतीय खिलाड़ी अब केवल मुख्यधारा के खेलों में ही नहीं, बल्कि पैरा खेलों में भी विश्व मंच पर अपनी धाक जमाने को तैयार हैं। पावरलिफ्टिंग जैसे तकनीकी खेलों में पदक जीतना एथलीट की सहनशक्ति और एकाग्रता का प्रमाण है।
आगे की चुनौतियां
अगले कुछ दिनों में मुकाबलों की तीव्रता बढ़ने वाली है। पदक तालिका में बार-बार बदलाव देखने को मिलेंगे। भारत को यदि शीर्ष 5 देशों में शामिल होना है, तो एथलीटों को अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को सुधारना होगा। खेलों के अगले चरण में यह देखना रोमांचक होगा कि क्या ऑस्ट्रेलिया का दबदबा बना रहता है या फिर अन्य देश उन्हें कड़ी चुनौती देने में सफल होते हैं।
झंडू कुमार का पदक न केवल एक जीत है, बल्कि यह उन हजारों भारतीय एथलीटों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में रहकर भी अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
खेल प्रेमियों के लिए आने वाले दिन और भी अधिक दिलचस्प होने वाले हैं, क्योंकि पदकों की रेस अब पूरी तरह से रफ्तार पकड़ चुकी है।







