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यूरिया की कमी से भड़के किसान, पंजाबभर में केंद्र सरकार के पुतले फूंके

चंडीगढ़,अंग भारत। पंजाब में यूरिया खाद की कमी को लेकर किसानों का गुस्सा सोमवार को सड़कों पर दिखाई दिया। राज्य के 22 जिलों में किसानों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ नारेबाजी की। कई स्थानों पर सरकार के पुतले फूंके गए और किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

22 जिलों में एक साथ उतरे किसान

ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा (एआईकेएमएम) के आह्वान पर पंजाब समेत पांच राज्यों में राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में पंजाब में करीब 74 स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में किसानों ने सड़कों पर उतरकर यूरिया खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

यूरिया की कमी से खेती पर संकट

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि प्रदेश के किसान इस समय यूरिया खाद की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जरूरत के समय किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध नहीं हो रहा, जिससे खेती के कार्य प्रभावित होने लगे हैं।पंधेर ने कहा कि यदि समय पर खाद नहीं मिली तो फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कालाबाजारी और अधिक कीमत वसूलने का आरोप

किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि बाजार में यूरिया की कालाबाजारी हो रही है। उनका कहना है कि कुछ निजी दुकानदार और सहकारी समितियां किसानों को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेच रही हैं।किसान नेताओं ने यह भी दावा किया कि कई स्थानों पर खाद विक्रेता किसानों को यूरिया देने के बदले नैनो यूरिया खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।

उचित दर पर खाद उपलब्ध कराने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में और निर्धारित दरों पर यूरिया उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि खेती के मौजूदा सीजन में खाद की कमी दूर करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

बढ़ती कीमतों पर भी जताई नाराजगी

किसान नेताओं ने डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि कृषि कार्यों की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

जमीन अधिग्रहण और व्यापार समझौते का भी विरोध

सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि आंदोलन केवल यूरिया संकट तक सीमित नहीं है। उन्होंने राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा में किसानों की जमीनों के कथित जबरन अधिग्रहण का भी विरोध किया।इसके अलावा किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी आपत्ति जताते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उनका कहना है कि ऐसे समझौते देश के किसानों के हितों को प्रभावित कर सकते हैं।

कई जिलों में हुआ व्यापक प्रदर्शन

यह विरोध प्रदर्शन अमृतसर, बठिंडा, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मोगा, पटियाला, रूपनगर, संगरूर, नवांशहर, श्री मुक्तसर साहिब, पठानकोट और तरनतारन सहित कई जिलों में आयोजित किया गया।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि यूरिया की उपलब्धता, कालाबाजारी पर रोक और अन्य मांगों को लेकर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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