सुपौल,अंग भारत। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर रविवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल की ओर से बालिकाओं के सम्मान एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, खेलकूद और साहस के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली बालिकाओं को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया गया। इस दौरान बालिकाओं को शिक्षा के महत्व, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष राजेश कुमार बच्चन के निर्देशन तथा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाली चांदनी कुमारी, करिश्मा कुमारी, कृति कुमारी और स्वाति कुमारी को सम्मानित किया गया। वहीं, खेलकूद के क्षेत्र में हाई जंप में उपलब्धि हासिल करने वाली भवानी कुमारी तथा एथलेटिक्स में बेहतर प्रदर्शन करने वाली लक्ष्मी कुमारी को सम्मान प्रदान किया गया। इसके अलावा साहस और बहादुरी का परिचय देने वाली दो अन्य बालिकाओं को भी सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने से बालिकाओं का उत्साह बढ़ा और उनकी उपलब्धियों को समाज के सामने प्रोत्साहित करने का अवसर मिला।
बालिकाओं को शिक्षा और आत्मनिर्भरता का दिया संदेश
कार्यक्रम में महिला न्यायिक पदाधिकारियों ने बालिकाओं से संवाद कर उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा बालिकाओं के सशक्तीकरण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षित और जागरूक बालिकाएं न केवल अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।संवाद के दौरान बालिकाओं को आत्मविश्वास बनाए रखने, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और जीवन में आने वाली चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और शिक्षा के बल पर वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। साथ ही लैंगिक समानता और बालिकाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
विधिक अधिकारों की दी गई जानकारी
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष राजेश कुमार बच्चन ने सम्मानित बालिकाओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय राहुल उपाध्याय ने बालिकाओं के सशक्तीकरण और उनके सर्वांगीण विकास को समाज की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव ने बालिकाओं को उनके विधिक अधिकारों और निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जरूरत पड़ने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क करने की प्रक्रिया के संबंध में भी बताया, ताकि आर्थिक या अन्य कठिनाइयों के कारण कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। सुपौल बार एसोसिएशन के सचिव सुधीर झा ने भी बालिकाओं को प्रोत्साहित करने और उनके विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों के महत्व पर अपने विचार रखे।
न्यायिक पदाधिकारियों समेत कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) राजेश कुमार, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामचंद्र प्रसाद, महिला न्यायिक पदाधिकारी नंदिता कुमारी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी निधि जायसवाल, किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान दंडाधिकारी शोभित सौरव, सुपौल बार एसोसिएशन के सचिव सुधीर मिश्रा तथा बाल कल्याण समिति की सदस्य अफसरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।इसके अलावा सम्मानित बालिकाओं के अभिभावक, संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, पैनल अधिवक्ता और पारा विधिक स्वयंसेवक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मंच संचालन मुंसिफ सुदीप पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी राखी कुमारी ने प्रस्तुत किया।जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं की प्रतिभा और उपलब्धियों को पहचान देना, उनके आत्मविश्वास को मजबूत करना तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना था। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बालिकाओं को समान अवसर, उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देकर समाज के विकास में उनकी भागीदारी को और मजबूत किया जा सकता है।







