तेहरान। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने युद्ध को ही कमाई का जरिया बना लिया है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इन दिनों जमकर ‘पैसा छाप’ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने खार्ग आइलैंड के पास ईरानी सैन्य ठिकानों को तो निशाना बनाया, लेकिन वैश्विक तेल संकट के डर से मुख्य तेल टर्मिनल को हाथ तक नहीं लगाया। इसी का फायदा उठाकर ईरान अपने ‘खार्ग टर्मिनल’ को पूरी क्षमता से चला रहा है और अपनी ‘घोस्ट फ्लीट’ (गुप्त टैंकरों) के जरिए चीन को धड़ल्ले से सप्लाई जारी रखे हुए है।
ईरान वर्तमान में रोजाना 17 से 20 लाख बैरल तेल का निर्यात कर रहा है, जिसका 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले खार्ग टर्मिनल से निकल रहा है। इसके अलावा, ईरान ने ‘होर्मुज स्ट्रेट’ से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर 16.5 करोड़ रुपए प्रति जहाज का भारी-भरकम ‘वॉर टैक्स’ (युद्ध कर) लगा दिया है। इससे ईरान की झोली तो भर रही है, लेकिन दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 112.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो बीते चार सालों का सबसे उच्चतम स्तर है।
खाड़ी देशों की रुकी सांसे, 70% तक गिरा उत्पादन
ईरान की होर्मुज स्ट्रेट पर मजबूत पकड़ ने सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों की कमर तोड़ दी है। हमलों के डर और बढ़ते बीमा प्रीमियम (जो 400% तक बढ़ चुका है) के कारण इन देशों का कुल तेल उत्पादन 70 प्रतिशत तक गिर गया है। दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक सऊदी अरब का उत्पादन 1 करोड़ बैरल से घटकर 80 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। होर्मुज बंद होने के कारण अरामको को अपने कई कुएं अस्थायी रूप से बंद करने पड़े हैं क्योंकि उनके स्टोरेज टैंक पूरी तरह भर चुके हैं।
यही हाल कतर का भी है, जहां ‘रास लफान’ गैस फैसिलिटी पर हमलों के बाद ‘फोर्स मेज्योर’ लागू कर दिया गया है, यानी अब सप्लाई की कोई गारंटी नहीं है। इराक में तो स्थिति और भी खराब है; वहां विदेशी कंपनियों ने अपना स्टाफ वापस बुला लिया है और उत्पादन 43 लाख से गिरकर महज 13 लाख बैरल रह गया है। कुवैत का निर्यात तो ‘वॉर टैक्स’ और नाकेबंदी के कारण लगभग शून्य पर पहुंच गया है।
मजबूर अमेरिका ने दी प्रतिबंधों में ढील
ग्लोबल मार्केट में बढ़ती महंगाई और तेल की किल्लत ने महाशक्ति अमेरिका को भी झुकने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की है कि महंगाई पर लगाम कसने के लिए ईरानी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी जा रही है। यह छूट 20 मार्च से 19 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। अमेरिका का मानना है कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के टैंकरों को बाजार में आने देने से लगभग 14 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे वैश्विक बाजार में मची हाहाकार को कुछ हद तक शांत किया जा सकेगा।
इस खबर को पढ़ें: इजराइल में ईरान के मिसाइल हमले में 200 लोग मारे गए, आईआरजीसी का दावा











One Response