नई दिल्ली,अंग भारत। मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े एक बड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में एक साथ छापेमारी की। एजेंसी की जांच में अब तक 142 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध अपराध आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पता चला है। मामला म्यांमार और बांग्लादेश से जुड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क से संबंधित बताया जा रहा है।
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तीन राज्यों में ईडी की बड़ी कार्रवाई
ईडी के आइजोल उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए चार स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की अगरतला जोनल यूनिट द्वारा दर्ज एक मामले के आधार पर की गई।
49 किलो से अधिक मेथामफेटामाइन की हुई थी बरामदगी
जानकारी के अनुसार, 21 अगस्त 2025 को त्रिपुरा में की गई कार्रवाई के दौरान 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 40 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। इसी मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए ईडी ने धनशोधन के पहलुओं की पड़ताल शुरू की थी।
अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का हुआ खुलासा
जांच में एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। ईडी के अनुसार, म्यांमार से मिजोरम के चम्फाई-जोखावथार मार्ग के जरिए मेथामफेटामाइन भारत लाई जाती थी। इसके बाद इस खेप को त्रिपुरा में मौजूद रिसीवरों तक पहुंचाया जाता था, जहां से इसका वितरण विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता था।
बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए छिपाया गया पैसा
ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि तस्करी से अर्जित धनराशि को कई बैंक खातों और कथित शेल कंपनियों के माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर स्थानांतरित किया गया। एजेंसी का मानना है कि इस नेटवर्क ने अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए जटिल वित्तीय लेनदेन का सहारा लिया।
142 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध राशि की पहचान
अब तक की जांच में 142 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध धनराशि की पहचान की जा चुकी है। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा धन के प्रवाह का पूरा तंत्र किस प्रकार संचालित किया गया।
सीमावर्ती क्षेत्रों पर जांच एजेंसियों की नजर
ईडी के मुताबिक, त्रिपुरा में जिन स्थानों पर छापेमारी की गई, वे बांग्लादेश सीमा से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। वहीं मिजोरम में एक तलाशी स्थल म्यांमार सीमा से लगभग 500 मीटर दूर बताया गया है। इससे संकेत मिलता है कि तस्करी नेटवर्क सीमावर्ती इलाकों का इस्तेमाल कर रहा था।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
प्रवर्तन निदेशालय फिलहाल धनशोधन, अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की गहन जांच कर रहा है। एजेंसी का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।











