रांची,अंग भारत। लोक आस्था और सूर्य उपासना का महान पर्व चैती छठ रविवार को नहाय-खाय के साथ श्रद्धा और भक्ति के माहौल में शुरू हो गया। चार दिनों तक चलने वाला यह कठिन व्रत प्रकृति, शुद्धता और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है, जिसमें व्रती कठोर नियमों का पालन करते हुए भगवान भास्कर की आराधना करते हैं।यह महापर्व 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा। परंपरा के अनुसार पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य और अंतिम दिन उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।23 मार्च को खरना (रात 8:42 बजे तक) 24 मार्च संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त लगभग 6:०० बजे),25 मार्च: प्रात: अर्घ्य (सूर्योदय सुबह 5:49 बजे) के साथ पूजा संपन्न होगाम्धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से बल, आरोग्य, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से संतान की कामना करने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में इस पर्व को लेकर भक्तों में उत्साह देखा जा रहा है। घाटों की सफाई, पूजन सामग्री की खरीदारी और तैयारियों का दौर जारी है, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।










