नई दिल्ली,अंग भारत। सोमवार को राज्य सभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने संसद भवन में 19 नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई। इस अवसर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, भाजपा के रामराव वडकुटे, माया इवनाते और ज्योती वाघमारे सहित अन्य सांसद उपस्थित थे।शपथ लेने वाले सांसदों ने संविधान और कर्तव्यों के प्रति अपनी वफादारी की पुष्टि की। इस अवसर पर राजनीतिक गलियारों में उत्साह और सौहार्द्र का माहौल रहा। शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित सभी नेताओं ने नए सांसदों को उनकी जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया।
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महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सांसदों ने ली शपथ
आज शपथ लेने वालों में महाराष्ट्र से रामदास बंदू अठावले, माया चिंतामन इवनाते, शरदचंद्र पवार, रामराव सखाराम वडकुटे और डॉ. ज्योति नागनाथ वाघमारे शामिल थे। तमिलनाडु से क्रिस्टोफर मणिक्कम, डॉ. अंबुमणि रामदास, कॉन्स्टेंडाइन रविंद्रन, एल. के. सुधीश, डॉ. एम. थंबीदुरई और तिरुची शिवा ने शपथ ली।पश्चिम बंगाल से बाबुल सुप्रियो बराल, डॉ. मेनका गुरुस्वामी, राजीव कुमार, रुक्मिणी मल्लिक और बिस्वजीत सिन्हा संसद सदस्य बने। वहीं ओडिशा से संतृप्त मिश्रा, दिलीप कुमार रे और मनमोहन सामल को राज्य सभा के नवनिर्वाचित सदस्य के रूप में शपथ दिलाई गई।सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सभी सांसदों को लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने और संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संसद में शपथ लेने वाले सभी सदस्य जनता की सेवा और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नवनिर्वाचित सांसदों की शपथ से राज्य सभा में नई ताकत
शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित नेताओं ने नवनिर्वाचित सदस्यों का स्वागत किया और कहा कि ये सांसद अपने क्षेत्र और जनता की समस्याओं को संसद में प्रमुखता से उठाएंगे। शपथ लेने के बाद सभी सांसदों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संविधान के प्रति अपनी वचनबद्धता दिखाई।शपथ ग्रहण समारोह ने राजनीतिक स्थिरता और संसद की कार्यप्रणाली को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। शरद पवार सहित कई वरिष्ठ नेता नए सांसदों को मार्गदर्शन देते हुए उपस्थित रहे। इस अवसर ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सभा में आगामी सत्रों में सक्रिय चर्चा और बिलों पर ठोस बहस देखने को मिलेगी।राज्य सभा में नए सांसदों की उपस्थिति से राजनीतिक बहसों में विविध दृष्टिकोण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व में संतुलन बढ़ेगा। इस तरह शपथ ग्रहण ने राज्य सभा में नई ऊर्जा और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।









