सुपौल,अंग भारत। जिले के पिपरा थाना क्षेत्र के बेलौखरा वार्ड संख्या-4 में स्थित सोनाई बाबा मंदिर परिसर में ग्रामीणों ने नशामुक्त समाज की नींव रखने के लिए एक साहसिक कदम उठाया है। इस बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया है कि गांव की सीमा के भीतर यदि कोई भी व्यक्ति स्मैक या अन्य प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की तस्करी करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। वहीं, नशे का सेवन करने वाले व्यक्ति को 5,100 रुपये का आर्थिक दंड भुगतना होगा। यह निर्णय गांव को “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” अभियान के तहत सुरक्षित बनाने के लिए लिया गया है। नियमों को तोड़ने वालों को तुरंत पुलिस के हवाले करने का भी सख्त निर्देश दिया गया है।
सामाजिक संकट की गंभीरता
बेलौखरा गांव के प्रबुद्ध नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता इस बात से चिंतित हैं कि सूखे नशे और स्मैक की लत ने युवाओं के भविष्य को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। मौखिक चेतावनी का दौर अब खत्म हो चुका है, क्योंकि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही थी। जब घर का कोई नौजवान नशे की चपेट में आता है, तो वह परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बिखर जाता है। इस सामाजिक बुराई के कारण गांव में चोरी, मारपीट और छीना-झपटी जैसी आपराधिक घटनाएं बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट मानना है कि यदि इस महामारी को अभी नहीं रोका गया, तो आने वाली पीढ़ी पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी।
निगरानी का ब्लूप्रिंट
जुर्माने के प्रावधान के साथ ही ग्रामीणों ने एक प्रभावी कार्ययोजना भी बनाई है ताकि तस्करों की हरकतों पर विराम लगाया जा सके। इसके लिए एक विशेष ‘निगरानी समिति’ का गठन किया गया है, जिसके पास निम्नलिखित जिम्मेदारी होंगी:
- सार्वजनिक स्थलों और गांव के सुनसान रास्तों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखना।
- बाहरी व्यक्तियों की संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल जांच करना।
- नशेड़ियों और तस्करों को रंगे हाथ दबोचकर साक्ष्य के साथ पुलिस को सौंपना।
- नशीले पदार्थों के संभावित ठिकानों की पहचान कर उन्हें प्रशासन को सूचित करना।
नशे का खतरनाक जाल
ग्रामीणों का कहना है कि बिहार के इस ग्रामीण इलाके में पारंपरिक नशों की जगह सिंथेटिक और रासायनिक नशों ने ले ली है। ये प्रतिबंधित इंजेक्शन और स्मैक सीधे मस्तिष्क की कार्यक्षमता को नष्ट करते हैं। यदि हर घर इस जहर के खिलाफ सजग नहीं हुआ, तो इन सौदागरों के नेटवर्क को तोड़ना असंभव होगा।
प्रशासनिक सहयोग
ग्रामीण केवल अपने स्तर पर ही प्रयास नहीं कर रहे, बल्कि वे चाहते हैं कि पुलिस प्रशासन भी इस मुहिम का हिस्सा बने। ग्रामीणों ने पिपरा थाना पुलिस से मांग की है कि बेलौखरा और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए। विशेषकर शाम और सुबह के समय पुलिस की मौजूदगी से असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त होंगे। नीचे दी गई तालिका में प्रस्तावित सहयोग के प्रमुख बिंदु दिए गए हैं:
| कार्य का प्रकार | जिम्मेदारी |
|---|---|
| नियमित पुलिस पेट्रोलिंग | पिपरा थाना प्रशासन |
| सूचना साझा करना | ग्रामीण निगरानी समिति |
| सख्त कानूनी कार्रवाई | कानून लागू करने वाली एजेंसियां |
सामुदायिक भागीदारी
सोनाई बाबा मंदिर में आयोजित इस बैठक में स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ जुटी थी। इस पहल ने साबित कर दिया है कि समाज अगर खुद को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प ले ले, तो किसी भी बड़ी बुराई को जड़ से खत्म किया जा सकता है। अब बेलौखरा की यह मुहिम पूरे सुपौल जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। सामाजिक न्याय के प्रति ग्रामीणों की यह निष्ठा अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल बन गई है। जब कानून और समाज का साथ मिलता है, तभी अपराध का खात्मा संभव है।








