Founder – Mohan Milan

कोसी पुनर्वासितों की मांगों को लेकर हजारों लोगों का धरना, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

सुपौल में कोसी पुनर्वासितों द्वारा जमीन के मालिकाना हक और होल्डिंग टैक्स माफी के लिए जिला प्रशासन के खिलाफ किया जा रहा भारी धरना प्रदर्शन।

सुपौल,अंग भारत। कोसी के विस्थापित और पुनर्वासित परिवारों की बरसों पुरानी समस्याओं को लेकर मंगलवार को जिला मुख्यालय में भारी हंगामा और प्रदर्शन देखने को मिला। समाजसेवी एवं युवा नेता लव यादव के नेतृत्व में हजारों लोगों ने सड़क पर उतरकर जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस प्रदर्शन की मुख्य मांग कोसी पुनर्वासित परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक (स्वामित्व अधिकार) दिलाना, भारी-भरकम होल्डिंग टैक्स को तुरंत पूरी तरह माफ करना और बेघर परिवारों को इंदिरा आवास (या वर्तमान में चल रही आवास योजना) का लाभ देना है। कोसी नदी की विभीषिका झेल चुके इन परिवारों का कहना है कि दशकों बाद भी वे अपनी ही जमीन पर बेगाने बनकर रह रहे हैं और उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रही हैं।

मुख्य मांगें क्या हैं?

कोसी पुनर्वासित परिवारों की मांगें सिर्फ कागजी नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे वर्षों का दर्द और प्रशासनिक उपेक्षा छिपी है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं, जिन्हें नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

प्रमुख समस्या वर्तमान स्थिति आंदोलनकारियों की मांग
जमीन का मालिकाना हक दशकों से पुनर्वासित जमीन पर बसे होने के बाद भी परिवारों के पास कोई कानूनी स्वामित्व दस्तावेज या सरकारी रसीद नहीं है। सरकार बिना किसी देरी के सभी विस्थापित परिवारों को उनकी जमीन का पक्का मालिकाना हक (स्वामित्व अधिकार) दे।
होल्डिंग टैक्स का बोझ बिना मालिकाना हक वाली जमीनों और कच्चे मकानों पर भी स्थानीय प्रशासन द्वारा जबरन टैक्स का नोटिस भेजा जा रहा है। गरीब विस्थापित परिवारों पर लगाए जा रहे होल्डिंग टैक्स को तुरंत और पूरी तरह से माफ किया जाए।
सरकारी आवास योजना जमीन के पक्के कागजात न होने के कारण गरीब परिवार इंदिरा आवास या प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित रह जाते हैं। सभी पात्र और जरूरतमंद विस्थापित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी आवास योजना का लाभ दिया जाए।

आंदोलन की पूरी कहानी

इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए सुपौल जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी इलाकों से हजारों की संख्या में विस्थापित परिवार सुपौल मुख्यालय पहुंचे। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और नौजवान शामिल थे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया, लेकिन लोगों का आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।

“कोसी के पीड़ित दशकों से अपने जायज अधिकारों के लिए भटक रहे हैं। सरकारें बदलती रहीं, अधिकारी आते-जाते रहे, लेकिन पुनर्वासित परिवारों की बदहाली दूर नहीं हुई। जब तक हमें हमारी अपनी ही जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल जाता और यह नाजायज होल्डिंग टैक्स माफ नहीं होता, तब तक हमारा यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। जरूरत पड़ी तो हम इसे और भी बड़ा रूप देंगे।”
— लव यादव, समाजसेवी एवं युवा नेता

लव यादव ने धरना को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासन इन बेसहारा लोगों की चुप्पी को इनकी कमजोरी न समझे। दशकों पहले बाढ़ ने इनका सब कुछ उजाड़ दिया था और आज प्रशासनिक नीतियां इन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज कर रही हैं।

होल्डिंग टैक्स का विवाद

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने होल्डिंग टैक्स को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब सरकार ने उन्हें उजाड़कर इस जमीन पर बसाया था, तब यह वादा किया गया था कि उन्हें बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी। आज बुनियादी सुविधाओं के नाम पर बस्तियों में जलजमाव और गंदगी का अंबार है, लेकिन टैक्स वसूलने के लिए अधिकारी दरवाजे पर खड़े हो जाते हैं। बिना मालिकाना हक वाली जमीनों पर होल्डिंग टैक्स वसूलना पूरी तरह से गैर-कानूनी और अमानवीय है।

आवास योजना का संकट

सरकार की योजनाओं का लाभ गरीबों तक न पहुंचने का एक बड़ा कारण कागजी जटिलताएं हैं। इंदिरा आवास योजना या वर्तमान में लागू आवास योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहली शर्त जमीन की रसीद या एलपीसी (Land Possession Certificate) होती है। कोसी पुनर्वासित परिवारों के पास यह दस्तावेज न होने के कारण ब्लॉक स्तर के अधिकारी उनके आवेदनों को खारिज कर देते हैं। इस वजह से कड़कड़ाती ठंड और तपती धूप में भी ये परिवार तिरपाल और झुग्गियों में रहने को मजबूर हैं।

विस्थापितों का पुराना दर्द

कोसी नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ के कारण लाखों लोग बेघर हो जाते हैं। दशकों पहले जब बड़ी आबादी विस्थापित हुई, तो सरकार ने उन्हें सुपौल के विभिन्न क्षेत्रों में पुनर्वासित तो कर दिया, लेकिन पुनर्वास की यह प्रक्रिया कभी पूरी नहीं की गई। पुनर्वास कॉलोनियों में न तो सड़कों की अच्छी व्यवस्था है, न ही पीने के साफ पानी की। सबसे बड़ी बात यह है कि इन परिवारों को उनकी अपनी ही जमीन का कोई कानूनी अधिकार नहीं दिया गया, जिससे वे हमेशा बेदखली के डर के साए में जीते हैं।

आगे की राह क्या है

इस गंभीर मानवीय और प्रशासनिक समस्या का समाधान केवल आश्वासन से नहीं हो सकता। जिला प्रशासन और राज्य सरकार को मिलकर एक विशेष कार्ययोजना बनानी होगी। इसके तहत कुछ व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं:

  • विशेष शिविरों का आयोजन: अंचल स्तर पर विशेष राजस्व शिविर लगाकर कोसी विस्थापितों की जमीनों का तुरंत सर्वे किया जाना चाहिए और मौके पर ही उन्हें मालिकाना हक के दस्तावेज सौंपे जाने चाहिए।
  • नियमों में ढील: सरकारी आवास योजनाओं का लाभ देने के लिए विस्थापित परिवारों के मामले में नियमों को थोड़ा लचीला बनाया जाए, ताकि बिना जमीन की रसीद के भी उन्हें पक्का मकान मिल सके।
  • टैक्स पर रोक: जब तक मालिकाना हक देने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन कॉलोनियों में होल्डिंग टैक्स की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए।

यदि प्रशासन समय रहते इन मांगों पर विचार नहीं करता है, तो आने वाले दिनों में यह आक्रोश एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी चेतावनी युवा नेता लव यादव ने स्पष्ट शब्दों में दे दी है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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