रांची,अंग भारत। देवघर के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें अब तक कुल 3,17,494 भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया। पवित्र श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का यह केंद्र सुबह 04:15 बजे से ही ‘बोल बम’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। प्रशासन द्वारा मंदिर की व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए बाह्य अर्घा और आंतरिक अर्घा की विशेष व्यवस्था की गई थी, जिसके माध्यम से भक्तों ने अपनी पूजा संपन्न की।
श्रद्धालुओं की भारी संख्या
सावन की पहली सोमवारी का विशेष महत्व होता है, और देवघर में इस बार रिकॉर्ड तोड़ भीड़ देखी गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 3,17,494 श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। इस भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए मंदिर प्रबंधन ने दो अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की थी:
- बाह्य अर्घा: इस माध्यम से 2,05,236 श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित किया।
- आंतरिक अर्घा: मंदिर के गर्भगृह के भीतर से 1,12,258 भक्तों ने पूजा-अर्चना पूरी की।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
लाखों की संख्या में उमड़ने वाले कांवरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी। सावन के पहले सोमवार को किसी भी प्रकार की भगदड़ या अप्रिय घटना को रोकने के लिए संपूर्ण कांवरिया पथ और मंदिर परिसर को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया था। पुलिस के जवानों की तैनाती हर संवेदनशील मोड़ और मुख्य मार्गों पर की गई थी ताकि श्रद्धालु बिना किसी डर के बाबा के दर्शन कर सकें।
अधिकारियों की सीधी निगरानी
देवघर के एसपी (पुलिस अधीक्षक) और डीसी (उपायुक्त) खुद पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। एसपी और डीसी ने सुबह से ही लगातार मंदिर परिसर का दौरा किया और कांवरिया पथ का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए तैनात अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके और भक्तों को जलार्पण में असुविधा न हो। अधिकारियों की यह सक्रियता श्रद्धालुओं के बीच भरोसा पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण रही।
सुविधा और प्रबंधन
इस वर्ष का श्रावणी मेला प्रबंधन पिछले वर्षों की तुलना में काफी उन्नत रहा। कांवरिया पथ पर पेयजल, चिकित्सा सहायता और अस्थायी शौचालय की व्यवस्था ने लंबी दूरी तय कर आने वाले भक्तों को काफी राहत दी। प्रशासन की कोशिश थी कि जो श्रद्धालु सुल्तानगंज से जल लेकर देवघर तक की कठिन यात्रा पूरी कर रहे हैं, उन्हें मंदिर परिसर में पहुंचते ही सुगम दर्शन प्राप्त हो। अर्घा प्रणाली लागू होने से लंबे समय तक कतार में खड़े रहने की समस्या में काफी कमी आई है, जिससे भीड़ का दबाव समय रहते कम हो जाता है।
भक्ति का अनूठा संगम
देवघर की गलियों में सुबह से ही केसरिया रंग पहने कांवरियों का तांता लगा रहा। ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। स्थानीय व्यापारियों से लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं तक, सभी ने बढ़-चढ़कर कांवरियों की सेवा की। पहली सोमवारी का यह दिन न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि प्रशासन के कुशल प्रबंधन और पुलिस जवानों की मेहनत के कारण पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। आने वाले सोमवारों के लिए भी प्रशासन ने अपनी तैयारियों को और अधिक मजबूत करने का संकेत दिया है ताकि श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर भी व्यवस्था सुचारू बनी रहे।







