Founder – Mohan Milan

असम में बाढ़ का संकट बरकरार, दो और शव मिले, 87 हुई मृतकों की संख्या

असम में बाढ़ के कारण जलमग्न गांव और घरों की छतों पर फंसे लोग, राहत बचाव कार्य की तस्वीर

गुवाहाटी,अंग भारत। असम में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहां वर्तमान में राज्य के सात जिले भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं। इस प्राकृतिक आपदा से चराईदेव, शिवसागर, धेमाजी, गोलाघाट, बिश्वनाथ, जोरहाट और लखीमपुर जिलों के कुल 380 गांवों की 1,28,071 आबादी पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। बाढ़ का सबसे घातक असर हमारी कृषि पर पड़ा है, जहां 14230.148 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह पानी में समा गई है। इसके साथ ही, शिवसागर जिले में दो और शव मिलने के बाद इस साल बाढ़ से जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 87 हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा खुद 2 अगस्त से ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं ताकि राहत और बचाव कार्यों में कोई ढिलाई न हो।

सात जिलों में तबाही

असम के आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस बार बाढ़ ने राज्य के 24 राजस्व मंडलों को अपनी चपेट में लिया है। इन प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों के सामने रहने और खाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। धेमाजी और लखीमपुर जैसे उत्तरी जिलों में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का पानी गांवों में घुस चुका है। 380 गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। लोग अपने घरों की छतों पर या ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। खेतों में सिर्फ पानी दिख रहा है, खड़ी फसल का अब नामोनिशान नहीं बचा है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है।

ऊपरी असम में बदतर हालात

बाढ़ की सबसे भयावह तस्वीर ऊपरी असम के जिलों से आ रही है। शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। शिवसागर जिला इस त्रासदी का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। यहां हालात वाकई डराने वाले हैं। सड़कों और गलियों की बात तो दूर, लोगों के बिस्तरों और रसोई घरों तक पानी और गाद भर चुकी है। पानी तो थोड़ा उतर रहा है, लेकिन पीछे छूटा कीचड़ जिंदगी को और दूभर बना रहा है। इस मुश्किल घड़ी में केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि कई स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक भी अपनी जान जोखिम में डालकर फंसे हुए लोगों तक सूखा राशन और पीने का पानी पहुंचा रहे हैं।

नदियों का रौद्र रूप

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी 3 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, नुमलीगढ़ इलाके में बहने वाली धनसिरि नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर नीचे आने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच सोमवार को शिवसागर से दो और लोगों के बह जाने की दुखद खबर आई, जिनके शव प्रशासन ने बरामद कर लिए हैं। मृतकों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि पानी का तेज बहाव कितना खतरनाक और जानलेवा साबित हो रहा है।

राहत शिविरों की स्थिति

बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए प्रशासन ने राहत शिविरों का जाल बिछाया है। वर्तमान में प्रभावित इलाकों में कुल 55 शिविर चलाए जा रहे हैं, जिनमें 38 सक्रिय राहत शिविर और 17 राहत वितरण केंद्र शामिल हैं। इन राहत शिविरों में इस समय 11,066 लोग रह रहे हैं, जिन्हें भोजन, शुद्ध पेयजल और बुनियादी दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इसके अलावा, जो लोग शिविरों में नहीं रह रहे हैं लेकिन बाढ़ से घिरे हैं, ऐसे 184 गैर-शिविर निवासियों को भी राहत केंद्रों के जरिए राशन और आवश्यक सामग्री बांटी जा रही है।

मुख्यमंत्री ग्राउंड जीरो पर

प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने और राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा खुद मैदान में उतरे हैं। वह बीती 2 अगस्त से लगातार ऊपरी असम के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का खुद जमीन पर मौजूद रहना स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ा संबल बना हुआ है। वे अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं, राहत सामग्री के वितरण की खुद निगरानी कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को मदद के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।

बाढ़ से जुड़े प्रमुख आंकड़े

विवरण आंकड़े / स्थिति
कुल प्रभावित जिले 7 (शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट आदि)
प्रभावित गांवों की संख्या 380 गांव
कुल प्रभावित आबादी 1,28,071 लोग
डूबी हुई कृषि भूमि 14,230.148 हेक्टेयर
अब तक कुल मौतें 87
सक्रिय राहत शिविर और केंद्र 55 (38 शिविर, 17 वितरण केंद्र)

बचाव कार्य में लगी एजेंसियां

इस आपदा से निपटने के लिए भारत की सबसे बेहतरीन राहत एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए निम्नलिखित टीमें मैदान में हैं:

  • एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF)
  • भारतीय सेना और अर्धसैनिक बल
  • डीडीआरएफ (DDRF) और वायुसेना (Air Force)
  • असम पुलिस और अग्निशमन सेवा (F&ES)
  • स्थानीय सिविल डिफेंस के प्रशिक्षित स्वयंसेवक

पिछले शनिवार को ही अकेले 23 नावों को रेस्क्यू ऑपरेशन में उतारा गया था। बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 76 विशेष मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं, जो लोगों की सेहत की जांच कर रही हैं और जरूरी दवाएं दे रही हैं।

बुनियादी ढांचे को भारी चोट

बाढ़ केवल इंसानी जिंदगी और फसलों को ही तबाह नहीं कर रही, बल्कि यह राज्य के बुनियादी ढांचे को भी मटियामेट कर रही है। ग्रामीण इलाकों में सड़कें बची नहीं हैं। पुल टूट चुके हैं और बिजली के खंभे उखड़ गए हैं। कई जगहों पर संपर्क पूरी तरह टूट जाने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में भारी दिक्कत आ रही है। लेकिन असल चुनौती पानी उतरने के बाद शुरू होगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन सड़कों और पुलों की दोबारा मरम्मत करने की होगी। इसके लिए राज्य स्तर पर लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं ताकि जैसे ही पानी का स्तर कम हो, वैसे ही युद्ध स्तर पर पुनर्निर्माण का काम शुरू किया जा सके।

Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
Picture of अंग भारत • रिपोर्टर

अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

Related Posts
Recent Posts
App Icon