गुवाहाटी, अंग भारत। असम में बाढ़ की विभीषिका से अभी लोग पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि राज्य के कई हिस्सों में दोबारा तबाही का खतरा मंडराने लगा है। वर्तमान में राज्य के 15 जिले इस आपदा की चपेट में हैं, जिससे 1,68,701 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। धनसिरि नदी का जलस्तर नुमलीगढ़ में खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिसके चलते निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। इस तबाही में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 96 हो गई है, जिसमें हाल ही में गोलाघाट और उदालगुरी जिले से बरामद किए गए दो शव भी शामिल हैं। सरकार प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री और आर्थिक मदद पहुंचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन लगातार खराब होते मौसम ने राहत कार्यों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
बाढ़ प्रभावित प्रमुख जिले
असम के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में पानी का जमाव इस कदर है कि 15 जिलों के कुल 39 राजस्व मंडल बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन क्षेत्रों के 481 गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। सबसे ज्यादा चिंता खेती-किसानी को लेकर है, क्योंकि कुल 14382.26 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह पानी में डूब चुकी है। इससे खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया है। प्रभावित जिलों की इस सूची में गोलाघाट, शिवसागर, उदालगुरी, कामरूप (मेट्रो), नगांव, कामरूप, दरंग, शोणितपुर, होजाई, लखीमपुर, बिश्वनाथ, जोरहाट, चराईदेव, कार्बी आंगलोंग और धेमाजी शामिल हैं।
ऊपरी असम में भारी तबाही
भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो इस समय ऊपरी असम की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां के चार प्रमुख जिले—शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट बाढ़ की नई लहर से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की 6 अगस्त की रिपोर्ट बताती है कि इन जिलों में बहने वाली नदियों के उफान के कारण संपर्क मार्ग टूट गए हैं। धनसिरि नदी का जलस्तर बढ़ने से गोलाघाट के तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है। स्थानीय प्रशासन की टीमें नावों के जरिए अंदरूनी इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के काम में लगातार जुटी हुई हैं।
सरकारी राहत और मुआवजा
बिगड़ते हालात को देखते हुए असम सरकार के मंत्री प्रभावित जिलों में खुद डेरा डाले हुए हैं। वे स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं ताकि राहत एवं पुनर्वास के काम में कोई ढिलाई न हो। प्रभावित परिवारों को तुरंत मदद देने के लिए सरकार ने प्रारंभिक तौर पर प्रत्येक परिवार को 15 हजार रुपये की फौरी आर्थिक सहायता मुहैया कराई है। इसके साथ ही, इस प्राकृतिक आपदा में अपनी जान गंवाने वाले मृतकों के आश्रितों के घावों पर मरहम लगाने के लिए 9-9 लाख रुपये की राहत राशि वितरित की जा रही है। बाढ़ के पानी के उतरते ही क्षतिग्रस्त हुए घरों का वास्तविक आकलन करने के लिए 9 अगस्त से एक व्यापक सर्वे शुरू किया जाएगा।
राहत शिविरों की स्थिति
बेघर हुए लोगों के लिए प्रशासन ने विभिन्न जिलों में राहत शिविर स्थापित किए हैं। वर्तमान में राज्य में 50 राहत शिविर और 83 राहत वितरण केंद्र सुचारू रूप से चलाए जा रहे हैं, जहां शरणार्थियों को भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। स्थिति को समझने के लिए राहत शिवरों से जुड़े आंकड़े नीचे दी गई तालिका में देखे जा सकते हैं:
| राहत व्यवस्था का विवरण | कुल संख्या / लाभार्थी |
|---|---|
| सक्रिय राहत शिविरों की संख्या | 50 |
| सक्रिय राहत वितरण केंद्र | 83 |
| शिविरों में आश्रय लिए हुए लोग | 10,111 |
| शिविरों से बाहर राहत पा रहे लोग | 35,596 |
इन राहत केंद्रों पर बच्चों के लिए दूध और बीमार लोगों के लिए आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति की जा रही है, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली महामारियों से बचा जा सके।
मकानों को पहुंचा नुकसान
तेज बहाव और कटाव के कारण लोगों के आशियाने पूरी तरह उजड़ चुके हैं। शिवसागर जिले से नुकसान के सबसे भयावह आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले शिवसागर जिले में ही 38 कच्चे मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। इसके अलावा, दो पक्के मकान भी बाढ़ की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए कच्चे मकानों की संख्या 285 दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में जब सर्वे का काम आगे बढ़ेगा, तो नुकसान का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। इन विस्थापित परिवारों को दोबारा बसाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
मुस्तैद हैं राहत एजेंसियां
संकट के इस समय में लोगों की जान बचाने के लिए राज्य और केंद्र की कई सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैदी से काम कर रही हैं। दुर्गम और जलमग्न इलाकों से लोगों को निकालने के काम में एसडीआरएफ (SDRF), सेना, अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ (NDRF), डीडीआरएफ (DDRF), वायु सेना और स्थानीय पुलिस की टीमें संयुक्त रूप से जुटी हुई हैं। इसके साथ ही अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं (F&ES), सर्कल कार्यालय के कर्मचारी, नागरिक सुरक्षा कर्मी और प्रशिक्षित स्थानीय स्वयंसेवक भी अपनी जान जोखिम में डालकर राहत पहुंचाने का काम कर रहे हैं। बाढ़ से सड़कें और पुल बह जाने के कारण परिवहन ठप है, लेकिन इसके बावजूद नावों और हेलीकॉप्टरों की मदद से आवश्यक सामग्री का वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।








