कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता और हावड़ा नगर निगमों के सुचारू संचालन और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए वार्डों की संख्या में बड़ा इजाफा करने का फैसला किया है। इस ऐतिहासिक फैसले को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए आगामी 12 अगस्त को राज्य विधानसभा का एक विशेष एक दिवसीय सत्र बुलाया गया है, जिसमें संबंधित संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देशों के अनुसार, कोलकाता नगर निगम (KMC) में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर सीधे 209 की जाएगी, जबकि हावड़ा नगर निगम (HMC) में वर्तमान 50 वार्डों को बढ़ाकर 68 किया जाएगा। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य 7 दिसंबर तक दोनों प्रमुख शहरों में लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित बोर्ड का गठन करना और उन्हें जिम्मेदारी सौंपना है।
वार्डों की नई संख्या
दोनों बड़े नगर निगमों की भौगोलिक और प्रशासनिक सीमाओं को व्यवस्थित करने के लिए वार्डों की संख्या बढ़ाना बेहद आवश्यक माना जा रहा था। कोलकाता और हावड़ा जैसे घनी आबादी वाले महानगरों में नागरिक सुविधाओं को जमीनी स्तर पर हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है। कोलकाता नगर निगम में अब तक कुल 144 वार्ड थे, जिन्हें अब नए फैसले के बाद बढ़ाकर 209 किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, हावड़ा नगर निगम में वार्डों की संख्या को 50 से बढ़ाकर 68 करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से स्थानीय पार्षदों के कार्यक्षेत्र का दायरा छोटा होगा, जिससे वे अपने क्षेत्र की समस्याओं पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
इस प्रशासनिक फेरबदल और वार्डों की नई स्थिति को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका में पुराने और नए आंकड़ों का विवरण दिया गया है:
| नगर निगम का नाम | वर्तमान वार्ड संख्या | प्रस्तावित नई वार्ड संख्या | कुल नए वार्डों की संख्या |
|---|---|---|---|
| कोलकाता नगर निगम (KMC) | 144 | 209 | 65 |
| हावड़ा नगर निगम (HMC) | 50 | 68 | 18 |
परिसीमन और चुनाव प्रक्रिया
राज्य सरकार का स्पष्ट कहना है कि विधानसभा सत्र में संशोधन विधेयक पारित होने के तुरंत बाद नए सिरे से परिसीमन (वार्डों के पुनर्गठन) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही दोनों नगर निगमों में चुनाव कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो सकेगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परिसीमन का काम तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। सरकार का अंतिम लक्ष्य यही है कि आगामी 7 दिसंबर तक कोलकाता और हावड़ा नगर निगमों में चुनाव की प्रक्रिया को पूरा कराकर जनता द्वारा चुनी गई नई परिषद को कामकाज सौंप दिया जाए।
विपक्ष के तीखे सवाल
जैसे ही सरकार की इस योजना की भनक विपक्ष को लगी, राजनीतिक गलियारों में विरोध के स्वर तेज हो गए। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इस पूरे मामले में मनमाने ढंग से काम कर रही है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को ताक पर रख रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वार्डों के पुनर्गठन से पहले एक मसौदा सूची जारी की जानी चाहिए थी। इस सूची को सार्वजनिक कर सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से उनकी राय, सुझाव या आपत्तियां मांगी जानी चाहिए थीं। विपक्ष का आरोप है कि इस अनिवार्य कदम को पूरी तरह दरकिनार कर सरकार सीधे एकतरफा फैसला लागू करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का कड़ा रुख
इसी राजनीतिक गतिरोध के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने सीधे तौर पर इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कोलकाता नगर निगम की प्रशासक एवं आयुक्त स्मिता पांडे से संपर्क साधकर वार्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी है। शुभंकर सरकार ने पूछा है कि इस संवेदनशील प्रक्रिया में विपक्षी दलों को शामिल करने और उनकी राय लेने को लेकर प्रशासन की क्या योजना है? कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि बिना सर्वदलीय सहमति और उचित विचार-विमर्श के उठाया गया ऐसा कोई भी कदम स्थानीय लोकतंत्र को कमजोर करेगा।
“वार्डों के पुनर्गठन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया जाना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जनता की भागीदारी और उनकी राय बेहद जरूरी है।”
– शुभंकर सरकार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
विधानसभा का विशेष सत्र
आगामी 12 अगस्त को होने वाला विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र काफी सरगर्मियों भरा रहने की उम्मीद है। इस सत्र में जहाँ एक तरफ सरकार संशोधन विधेयक को पारित कराकर अपने फैसले को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सरकार को घेरने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है। सदन के भीतर न केवल वार्डों की संख्या बढ़ाने के फैसले पर चर्चा होगी, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की कथित अनदेखी का मुद्दा भी गरमाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सत्र केवल एक संशोधन विधेयक पारित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आने वाले दिनों में होने वाले निगम चुनावों के लिए एक बड़ी सियासी जंग की नींव साबित होगा।








