रांची,अंग भारत। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर सदन के बाहर भारी हंगामा देखने को मिला। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधायकों ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विधानसभा परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग की। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के विधायकों ने सरकार पर राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का सीधा आरोप लगाया।
विपक्ष का तीखा विरोध
विधानसभा की सीढ़ियों पर खड़े होकर विपक्षी विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में भाजपा और आजसू के तमाम बड़े चेहरे शामिल थे। प्रदर्शनकारी विधायकों का कहना है कि झारखंड में सरकारी नौकरी पाना अब युवाओं की योग्यता पर नहीं, बल्कि पैसों के लेनदेन और सेटिंग पर निर्भर हो गया है। जेएसएससी और जेपीएससी की परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने राज्य की साख को देश भर में गिराया है। छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध लेने के बजाय अपनी कमियों को छिपाने में जुटी हुई है।
युवाओं के टूटे सपने
झारखंड के छात्र सालों-साल किराए के कमरों में रहकर, तंगी झेलकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन जब परीक्षा का समय आता है, तो या तो पेपर लीक हो जाता है या फिर धांधली की खबरें सामने आती हैं। जेएसएससी परीक्षा के दौरान जो कुछ भी हुआ, उसने छात्रों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया है। परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्रों का कथित तौर पर बिकना और सोशल मीडिया पर लीक होना अब आम बात बन चुकी है। विपक्षी विधायकों ने साफ कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है जिसे राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है।
बाबूलाल मरांडी का हमला
प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि राज्य में सरकारी नौकरियां खुलेआम बाजार में बेची जा रही हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा, “जब से हेमंत सोरेन के नेतृत्व में यह सरकार बनी है, तब से शायद ही कोई ऐसी प्रतियोगी परीक्षा हुई हो जिसमें धांधली या पेपर लीक की शिकायत न आई हो। आज आम लोगों के बीच भी यह चर्चा होने लगी है कि किस विभाग में नौकरी पाने के लिए कितने रुपये की बोली लग रही है।” उन्होंने मांग की कि इस पूरे भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि पर्दे के पीछे छिपे असली गुनहगारों को बेनकाब किया जा सके।
राहुल गांधी पर सवाल
अपने बयान में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व और विशेष रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी लपेटे में लिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पूरे देश में घूम-घूमकर युवाओं के अधिकारों और रोजगार की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन झारखंड में जब उनकी ही सहयोगी पार्टी की सरकार युवाओं के सपनों को कुचल रही है, तो वे पूरी तरह मौन धारण किए हुए हैं। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को तुरंत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस गंभीर मुद्दे पर बात करनी चाहिए और अगर मुख्यमंत्री उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं, तो कांग्रेस को इस कथित भ्रष्ट गठबंधन सरकार से अपना नाता तोड़ लेना चाहिए।
मुख्य मांगें
विपक्षी गठबंधन ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं, जिन्हें लेकर वे सदन के अंदर भी सरकार को घेरने की तैयारी कर चुके हैं:
- जेपीएससी और जेएसएससी की पिछली सभी संदिग्ध परीक्षाओं की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
- भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए एक नया और मजबूत परीक्षा सुरक्षा तंत्र स्थापित किया जाए।
- पेपर लीक और नौकरियों की खरीद-फरोख्त में शामिल बड़े चेहरों और दलालों को तुरंत गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
- परीक्षाएं समय पर पूरी की जाएं और बार-बार रद्द होने वाली परीक्षाओं से छात्रों को होने वाले मानसिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई की जाए।
सदन में हंगामा तय
राजग विधायकों ने साफ कर दिया है कि वे इस मुद्दे को केवल विधानसभा के बाहर ही नहीं छोड़ेंगे, बल्कि पूरे मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर भी सरकार से जवाब मांगेंगे। विपक्ष का मानना है कि युवाओं के रोजगार और परीक्षाओं में हो रहा भ्रष्टाचार आज के समय में झारखंड का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है और सरकार इन सवालों से बचकर नहीं भाग सकती। दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष का दावा है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़े कानून बनाए गए हैं। बहरहाल, विपक्ष के तीखे तेवरों को देखकर यह साफ है कि आने वाले दिनों में मानसून सत्र के दौरान सदन के भीतर भारी हंगामा और तीखी नोकझोंक देखने को मिलेगी।







