रांची,अंग भारत। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को भारी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिली, जहां राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विपक्ष के तीखे हंगामे और नारेबाजी के बीच वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया। इस अनुपूरक बजट का कुल आकार 8,399 करोड़ 31 लाख 11 हजार रुपये तय किया गया है। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित तौर पर हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर सरकार को घेरने में जुट गए। भारी शोर-शराबे और तख्तियां लहराने के बीच ही वित्त मंत्री ने इस भारी-भरकम वित्तीय दस्तावेज को पटल पर रखा, जिससे साफ है कि राज्य सरकार विकास योजनाओं को गति देने के लिए अतिरिक्त फंड जुटाने की तैयारी में है।
बजट की जरूरत क्यों?
आम तौर पर लोग सोचते हैं कि जब साल की शुरुआत में मुख्य बजट पास हो जाता है, तो इस अतिरिक्त बजट की क्या जरूरत पड़ती है? दरअसल, वित्तीय वर्ष के दौरान कई बार ऐसी योजनाएं सामने आती हैं जिनके लिए पहले से पैसा तय नहीं होता। सरकार के सामने अचानक आने वाले खर्चों, पुरानी योजनाओं में पैसों की कमी या नई आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 205 के तहत अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) लाने का प्रावधान है। झारखंड सरकार द्वारा पेश किया गया यह 8,399 करोड़ रुपये से अधिक का बजट भी इसी वित्तीय संतुलन को बनाए रखने की एक कोशिश है। इस राशि का इस्तेमाल राज्य की जारी विकास परियोजनाओं को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए किया जाएगा।
हंगामे की मुख्य वजह
सदन के भीतर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर जब अपनी फाइलें खोल रहे थे, ठीक उसी वक्त विपक्षी सदस्य वेल में आकर सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। इस विरोध प्रदर्शन के केंद्र में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं से जुड़ा विवाद है। पिछले कुछ समय से परीक्षाओं के आयोजन, कॉपियों के मूल्यांकन और कथित धांधली को लेकर छात्र सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष ने इसी जन-आक्रोश को सदन के भीतर हथियार बनाया। उनका आरोप है कि राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और योग्य उम्मीदवारों को नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। इस गंभीर मुद्दे पर विपक्ष तुरंत चर्चा और जांच की मांग कर रहा था।
बजट के मुख्य आंकड़े
इस प्रथम अनुपूरक बजट के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार वित्तीय प्रबंधन को लेकर काफी गंभीर है।
- कुल आवंटित बजट राशि: 8,399 करोड़ 31 लाख 11 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि तय की गई है।
- मुख्य उद्देश्य: विभिन्न विभागों में चल रही लोक कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त फंड की व्यवस्था करना।
- संसदीय प्रक्रिया: इस बजट पर सदन में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, जिसके बाद ही इसे पूर्ण रूप से पारित माना जाएगा।
इसके साथ ही, हंगामे के बीच ही विधानसभा की विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों की रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी गई। इन रिपोर्ट्स में राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई अहम सुझाव शामिल हैं, जिन पर आने वाले दिनों में बहस होनी तय है।
कार्रवाई सोमवार तक स्थगित
जब शोर-शराबा थमता नहीं दिखा और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध लगातार बढ़ता गया, तो विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने मोर्चा संभाला। उन्होंने विपक्षी विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन को सुचारू रूप से चलाने की बार-बार अपील की। लेकिन जब विधायकों ने नारेबाजी बंद नहीं की और सदन की मर्यादा प्रभावित होने लगी, तो अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कड़ा रुख अपनाते हुए सदन की कार्यवाही को सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। अब देखना यह होगा कि सोमवार को जब सदन दोबारा बैठेगा, तो क्या सरकार इस अनुपूरक बजट पर शांतिपूर्ण चर्चा करा पाएगी या फिर युवाओं के रोजगार का यह मुद्दा फिर से हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा।
युवाओं से जुड़ा मुद्दा
झारखंड जैसे राज्य में रोजगार का मुद्दा हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में जरा सी भी गड़बड़ी की खबर आते ही राज्य का सियासी पारा चढ़ जाता है। युवाओं की मांग है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की धांधली को बर्दाश्त न किया जाए। विधानसभा के भीतर इस मुद्दे पर हंगामा होना यह दिखाता है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्षी दलों का मानना है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को घेरकर वे जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत कर सकते हैं, जबकि सरकार का दावा है कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।







