कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल में सक्रिय मानसून के चलते मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। दक्षिण बंगाल के जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की उम्मीद है, जबकि दक्षिण 24 परगना, पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर में 7 से 20 सेंटीमीटर तक मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। मौसम विभाग ने कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों पर स्थानीय चेतावनी संकेत संख्या-3 जारी करते हुए मछुआरों को 8 अगस्त तक समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी है।
दक्षिण बंगाल में आफ़त
दक्षिण बंगाल के मैदानी इलाकों में अगले कुछ घंटे भारी पड़ने वाले हैं। हवाओं का रुख तेजी से बदल रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इस रफ्तार से चलने वाली हवाएं कमजोर पेड़ों और कच्चे ढांचों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। उत्तर और दक्षिण 24 परगना में मानसून की सबसे ज्यादा सक्रियता दिख रही है। बादलों की आवाजाही के साथ मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो चुका है। हावड़ा और हुगली में भी गरज-चमक के साथ तेज पानी बरसने के आसार हैं।
मेदिनीपुर में भारी संकट
पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर में बारिश का स्तर सामान्य से कहीं ज्यादा रहने वाला है। इन दोनों जिलों में कुछ जगहों पर 7 से 20 सेंटीमीटर तक पानी बरस सकता है। इतनी भारी बारिश से निचले इलाकों में पानी जमा होना तय है। स्थानीय प्रशासन ने निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है क्योंकि अचानक जलस्तर बढ़ने से खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
कोलकाता का हाल
महानगर कोलकाता में सुबह से ही आसमान में काले बादलों का डेरा है। शहर के अधिकांश इलाकों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश हो रही है, लेकिन कुछ जगहों पर अचानक तेज हवाओं के साथ भारी बौछारें गिर सकती हैं। इसके चलते दफ्तर जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ सकता है। नगर निगम की टीमें जलभराव से निपटने के लिए ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों को अलर्ट पर रख चुकी हैं। कोलकाता की पुरानी गलियों में पानी जमा होने की आशंका सबसे ज्यादा है।
उत्तर बंगाल का मौसम
पहाड़ी इलाकों में भी मानसून पूरी तरह मेहरबान है। दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूचबिहार जैसे पर्वतीय जिलों में बारिश की रफ्तार काफी तेज रहेगी। पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (landslide) का खतरा हमेशा बना रहता है, इसलिए यात्रियों को संभलकर सफर करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, मालदा और दोनों दिनाजपुर (उत्तर और दक्षिण) में भी गरज-चमक के साथ लगातार बौछारें गिरती रहेंगी। पहाड़ों से बहने वाली नदियां उफान पर आ सकती हैं जिससे तटीय इलाकों में कटाव का खतरा बढ़ गया है।
समुद्र में बड़ा अलर्ट
मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी और उससे सटे ओडिशा तट पर समुद्र के भीतर मौसम बेहद खराब है। वहां 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं, जो बढ़कर 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। ऐसी खतरनाक लहरों के बीच नावों का संतुलन बिगड़ना तय है। इसी वजह से 8 अगस्त तक समुद्र में जाने पर पूरी तरह रोक है। कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह के अधिकारियों ने अपने जहाजों को सुरक्षित स्थानों पर बांधने के निर्देश दिए हैं और वहां स्थानीय सावधानी संकेत संख्या-तीन लागू कर दिया गया है।
बिजली से कैसे बचें
मौसम विभाग ने सबसे बड़ा खतरा आकाशीय बिजली (lightning) को बताया है। जब आसमान में काले बादल गरज रहे हों, तो लोगों को खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले किसानों को विशेष रूप से सचेत रहने की जरूरत है। बिजली कड़कने के दौरान पक्के घरों के अंदर रहना ही सबसे सुरक्षित उपाय है। लोहे की खिड़कियों और बिजली के उपकरणों से दूरी बनाए रखना बेहतर होगा।
पश्चिमी जिलों की स्थिति
झाड़ग्राम, पुरुलिया और बांकुड़ा जैसे पश्चिमी जिलों में शुष्क मौसम के बाद अब अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही पूर्व और पश्चिम बर्धमान, बीरभूम, मुर्शिदाबाद और नदिया में भी गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन खेतों में जलभराव की नई चिंता खड़ी हो गई है। इन जिलों में तेज हवा के थपेड़े फसलों को थोड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन सूखे तालाबों के भरने से किसानों के चेहरे पर थोड़ी खुशी भी है।







