शिमला,अंग भारत। हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की रफ्तार फिलहाल थमने वाली नहीं है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य में अगले छह से सात दिनों तक लगातार बारिश की चेतावनी दी है, जिसका साफ मतलब है कि 14 अगस्त तक पहाड़ों पर लोगों को राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने 10 और 11 अगस्त को राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई है और इसे लेकर ‘ऑरेंज अलर्ट’ भी जारी किया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते राज्य में भूस्खलन का दौर शुरू हो चुका है, जिससे 185 सड़कें बंद हो गई हैं और बिजली तथा पानी की सप्लाय पूरी तरह ठप हो गई है।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में हिमाचल के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। स्थानीय लोगों को मौसम के बदलावों पर लगातार नजर रखनी होगी क्योंकि अगले एक हफ्ते तक मौसम काफी खराब रहने वाला है।
- 8 और 9 अगस्त: राज्य के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश की संभावना है। इन दो दिनों के लिए विभाग ने ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।
- 10 और 11 अगस्त: ये दो दिन राज्य के लिए सबसे संवेदनशील रहने वाले हैं। बादलों के भयंकर बरसने की आशंका को देखते हुए विभाग ने ‘ऑरेंज अलर्ट’ लागू किया है।
- 12, 13 और 14 अगस्त: बारिश की तीव्रता में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन खतरा टलेगा नहीं। इन तीन दिनों के लिए भी ‘येलो अलर्ट’ रहेगा।
सड़कों पर बड़ा संकट
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पहाड़ों से लगातार गिर रहे मलबे और लैंडस्लाइड के कारण शनिवार सुबह तक पूरे हिमाचल प्रदेश में 185 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। इससे कई इलाकों का संपर्क मुख्य शहरों से टूट गया है।
| प्रभावित जिला | बंद सड़कों की संख्या |
|---|---|
| मंडी | 92 |
| कुल्लू | 48 |
| चंबा | 14 |
| शिमला | 14 |
| सिरमौर | 9 |
| कांगड़ा | 5 |
| ऊना | 3 |
सड़कों के बंद होने से सबसे ज्यादा नुकसान मंडी जिले को उठाना पड़ा है। यहां 92 अहम संपर्क मार्ग बंद हैं, जिसके कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भारी बाधा आ रही है। पर्यटकों की गाड़ियां भी चंबा और शिमला जैसे मुख्य पहाड़ी रास्तों पर फंसी हुई हैं।
बिजली और पानी ठप
तेज बारिश और भूस्खलन की वजह से हिमाचल में बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। पूरे राज्य में इस समय 104 बिजली के ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं, जिसकी वजह से सैकड़ों गांव अंधेरे में डूब गए हैं। इसके अलावा पेयजल संकट भी गहरा गया है।
बिजली की स्थिति
कुल्लू जिला बिजली संकट से सबसे ज्यादा जूझ रहा है, जहां 53 ट्रांसफार्मर बंद हैं। मंडी जिले में भी 34 ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली गुल है। इसके अतिरिक्त किन्नौर में 12 और चंबा में 1 ट्रांसफार्मर बंद पड़ा है, जिससे मरम्मत का काम भी बारिश के चलते धीमा चल रहा है।
पेयजल की समस्या
राज्य में कुल 77 पेयजल आपूर्ति योजनाएं इस समय पूरी तरह से ठप हैं। इनमें सबसे बदतर हालत सिरमौर जिले की है, जहां अकेले 55 पानी की योजनाओं पर ताला लग गया है। मलबे के कारण पाइपलाइनों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे लोगों को पीने के साफ पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
कहां कितनी हुई बारिश
पिछले 24 घंटों में बादलों ने हिमाचल के कई हिस्सों को तरबतर कर दिया है। कांगड़ा जिले के धर्मशाला में सबसे ज्यादा 48.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी बारिश का असर देखा गया है:
- कुल्लू जिला: बाजौरा ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में 31.5 मिलीमीटर, मनाली में 22 मिलीमीटर, भुंतर में 21 मिलीमीटर और कोठी में 18 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।
- मंडी जिला: सलापड में 21.8 मिलीमीटर, मुरारी देवी में 20 मिलीमीटर, सुंदरनगर में 15 मिलीमीटर और जोगिंदरनगर में 16 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
- शिमला जिला: सराहन में 15.6 मिलीमीटर और शिमला शहर में 15 मिलीमीटर पानी गिरा।
- सिरमौर जिला: धौलाकुआं ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में 14 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
पहाड़ों की सुरक्षा सलाह
लगातार हो रही बारिश के कारण नदी और नाले उफान पर हैं। मौसम विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नदी-नालों के पास न जाने की कड़ी हिदायत दी है। पहाड़ों की मिट्टी इस समय पानी सोखने के कारण ढीली पड़ चुकी है, जिससे संवेदनशील इलाकों और भूस्खलन वाले रास्तों पर यात्रा करना जानलेवा साबित हो सकता है। जब तक मौसम सामान्य न हो, तब तक सुरक्षित स्थानों पर ही रहने की सलाह दी गई है।







