पलामू,अंग भारत। झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में चल रहे छात्रों के अनिश्चितकालीन धरने को राष्ट्रीय परशुराम युवा वाहिनी ने अपना खुला समर्थन दे दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और सरकारी नौकरियों की बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के खिलाफ युवा सड़कों पर हैं। इस बीच, राष्ट्रीय परशुराम युवा वाहिनी की झारखंड प्रदेश कार्यसमिति ने आंदोलनकारी छात्रों के हक में आवाज बुलंद की है। संगठन ने न केवल आंदोलन का समर्थन किया, बल्कि मैदान में उतरकर छात्रों का हौसला बढ़ाया और सरकार से जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की।
छात्रों के बीच सेवा कार्य
शनिवार की सुबह रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। राष्ट्रीय परशुराम युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ता सुबह-सुबह धरना स्थल पर पहुंचे। वहां धरने पर बैठे सैकड़ों परेशान और थके हुए छात्रों के लिए मुफ्त जलपान और पीने के पानी की व्यवस्था की गई। इस सेवा कार्य में संगठन के प्रदेश संयोजक संजय शुक्ला भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखे। रांची और पलामू के तमाम कार्यकर्ताओं ने मिलकर छात्रों के बीच नाश्ता बांटा और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे इस हक की लड़ाई में अकेले नहीं हैं।
युवाओं के भविष्य पर चोट
धरना स्थल पर छात्रों को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि परीक्षाओं में हो रही धांधली कोई आम बात नहीं है, बल्कि यह लाखों युवाओं के भविष्य के साथ सीधे खिलवाड़ है। झारखंड के मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के बच्चे सालों-साल शहरों के छोटे कमरों में रहकर दिन-रात तैयारी करते हैं। उनके माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई इन परीक्षाओं की फीस, किताबों और कोचिंग में लगा देते हैं। ऐसे में जब परीक्षा से ठीक पहले पेपर लीक हो जाता है या रिजल्ट में गड़बड़ी आती है, तो सिर्फ एक छात्र नहीं, बल्कि पूरा परिवार टूट जाता है।
धांधली के खिलाफ तीखे सवाल
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं का इतिहास हाल के दिनों में विवादों से घिरा रहा है। जेएसएससी (JSSC) और जेपीएससी (JPSC) जैसी परीक्षाओं को लेकर लगातार उठते सवालों ने सरकारी तंत्र की साख पर बट्टा लगाया है। देवेंद्र तिवारी ने कहा कि व्यवस्था की नाकामी का खामियाजा अंततः ईमानदार और योग्य छात्रों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आखिर क्यों हर बार परीक्षा एजेंसियों की गोपनीयता पर सवाल उठते हैं? क्यों समय पर परीक्षाएं नहीं हो पातीं और अगर होती भी हैं, तो वे कोर्ट-कचहरी और विवादों के चक्कर में फंस जाती हैं?
सरकार से प्रमुख मांगें
छात्रों के इस बड़े आंदोलन के बीच राष्ट्रीय परशुराम युवा वाहिनी ने सरकार के सामने कुछ स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच: हाल के दिनों में जिन भी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक या अनियमितता की शिकायतें आई हैं, उनकी एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
- पारदर्शी भर्ती प्रणाली: परीक्षा के आयोजन से लेकर आंसर की (Answer Key) जारी करने और रिजल्ट घोषित करने तक की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाया जाए।
- कड़े कानून की मांग: पेपर लीक करने वाले गिरोहों और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई ऐसा करने की हिम्मत न कर सके।
- समयबद्ध नियुक्तियां: सरकारी नौकरियों के लिए एक निश्चित कैलेंडर जारी हो और उसी के अनुसार तय समय के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
राष्ट्रीय परशुराम युवा वाहिनी ने सरकार को चेतावनी दी है कि वह छात्रों की इन जायज मांगों को हल्के में न ले। देवेंद्र तिवारी ने कहा कि युवा देश की रीढ़ हैं और जब रीढ़ पर ही हमला होगा, तो समाज शांत नहीं बैठ सकता। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बिना किसी देरी के छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत की जाए और एक सकारात्मक समाधान निकाला जाए। अगर सरकार ने जल्द ही कोई बड़ा और पारदर्शी निर्णय नहीं लिया, तो राष्ट्रीय परशुराम युवा वाहिनी पूरे राज्य में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से बड़ा आंदोलन छेड़ेगी, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन की होगी।
युवाओं में बढ़ता जनाक्रोश
रांची की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब केवल एक तात्कालिक गुस्सा नहीं है। यह सालों से जमा हो रहा आक्रोश है। छात्र थक चुके हैं। उम्र सीमा पार हो रही है। वैकेंसी आती नहीं, और जब आती है तो विवादों में घिर जाती है। संजय शुक्ला ने भी इस मौके पर कहा कि युवा केवल अपने हक का रोजगार मांग रहे हैं, कोई खैरात नहीं। जब तक परीक्षाओं की शुचिता बहाल नहीं होगी, तब तक युवाओं का यह गुस्सा शांत होने वाला नहीं है। पलामू और रांची के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर संकल्प लिया है कि वे इस लड़ाई को आखिरी दम तक लड़ेंगे।







