कोलकाता,अंग भारत। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हाई-प्रोफाइल नाश्ता बैठक में शामिल होने के ठीक 24 घंटे बाद, नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के दो सांसदों, अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान ने अपनी राजनीतिक दिशा को लेकर चल रही सभी अटकलों पर शनिवार को स्थिति स्पष्ट कर दी। दोनों सांसद अचानक कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय नवान्न पहुंचे और वहां मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इस मुलाकात के तुरंत बाद आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में दोनों सांसदों ने साफ तौर पर कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल नहीं हो रहे हैं। संसद के दस्तावेजों में वे आज भी तृणमूल कांग्रेस के ही सदस्य के रूप में दर्ज हैं। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जहां एक ओर ये नेता केंद्र के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य स्तर पर अपनी मांगों को लेकर मुखर नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक स्थिति पर सफाई
सांसदों के इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म था, जिस पर विराम लगाते हुए अबू ताहेर खान ने कहा कि लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में अब भी उन्हें अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सांसद के रूप में ही दर्ज किया गया है। संसद की कार्यवाही के दौरान भी लोकसभा अध्यक्ष उन्हें तृणमूल कांग्रेस के सांसद के तौर पर ही संबोधित करते हैं और वहां उनके नाम के साथ इसी पार्टी का उल्लेख होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से वे अभी भी पुरानी पार्टी के ही अंग हैं।
अबू ताहेर खान ने आगे कहा कि कागजों पर उनकी वर्तमान पार्टी एनसीपीआई अभी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की औपचारिक सहयोगी नहीं बनी है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में राजग की किसी आधिकारिक बैठक में उन्हें आमंत्रित किया जाता है, तो वे उसमें जरूर शामिल होंगे। हालांकि, उन्होंने भाजपा में शामिल होने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।
पाले बदलने की अटकलें
इन दोनों सांसदों के बयानों ने राज्य की राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। इससे पहले अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान ने राजग और भाजपा से स्पष्ट दूरी बनाए रखने की बात कही थी। लेकिन इसके बाद अचानक तीनों नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के तुरंत बाद शुक्रवार को अबू ताहेर और खलीलुर रहमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ आयोजित नाश्ता बैठक में भी शामिल हुए।
लगातार बदलते इन समीकरणों के बीच जब पत्रकारों ने दोनों सांसदों से पूछा कि क्या वे भविष्य में एनसीपीआई में बने रहेंगे या किसी अन्य राजनीतिक विकल्प पर विचार कर रहे हैं, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। दोनों ने केवल इतना कहा कि आने वाले वक्त में वे किस पार्टी के साथ चलेंगे, यह समय ही तय करेगा।
मतदाता सूची पर चिंता
नवान्न में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ हुई इस बैठक में केवल राजनीतिक समीकरणों पर ही बात नहीं हुई, बल्कि इसमें जनता से जुड़े दो बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा की गई। पहला मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ा हुआ था। सांसदों का कहना है कि राज्य के पिछड़े और गरीब वर्ग के लोगों को इस सरकारी प्रक्रिया की पूरी और सही जानकारी नहीं है, जिसके कारण बड़ी संख्या में पात्र लोग मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि पहले चरण में लगभग सात लाख योग्य लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, सांसदों ने बाकी बचे लगभग 20 लाख लोगों के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख को बढ़ाने की मांग केंद्र और राज्य सरकार दोनों के समक्ष मजबूती से रखी है।
बैठक के मुख्य बिंदु
नवान्न में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई और जो सहमति बनी, उसे नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| चर्चा के मुख्य विषय | सांसदों का पक्ष | मुख्यमंत्री का आश्वासन |
|---|---|---|
| राजनीतिक संबंद्धता | कागजों पर अभी भी तृणमूल कांग्रेस के सांसद, भाजपा में शामिल होने का कोई इरादा नहीं। | सांसदों के स्वतंत्र निर्णय और भविष्य की राजनीतिक प्राथमिकताओं का संज्ञान लिया। |
| मतदाता सूची पुनरीक्षण | 20 लाख से अधिक गरीब लोगों के नामांकन के लिए आवेदन की समयसीमा बढ़ाई जाए। | प्रथम चरण में 7 लाख लोगों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का भरोसा। |
| धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर | पुलिस की कथित अति-सक्रियता और एक समुदाय को निशाना बनाने की कार्रवाई पर रोक लगे। | किसी भी विशेष समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाएगा, पूरे मामले की जांच होगी। |
लाउडस्पीकर विवाद और कार्रवाई
बैठक के दौरान दूसरा सबसे संवेदनशील मुद्दा राज्यभर में मस्जिदों से माइक और लाउडस्पीकर हटाने की हालिया प्रशासनिक कार्रवाई का था। दोनों सांसदों ने मुख्यमंत्री के समक्ष पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विशेष क्षेत्रों में पुलिस की कथित अति-सक्रियता के चलते एक खास मजहबी समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम लोगों में अशांति और असुरक्षा का माहौल पनप रहा है।
सांसदों ने यह भी दावा किया कि इस संवेदनशील विषय को उन्होंने दो दिन पहले दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने भी उठाया था। वे चाहते हैं कि इस मामले में कानून के नाम पर किसी भी नागरिक को परेशान न किया जाए।
मुख्यमंत्री का आश्वासन
सांसदों की चिंताओं को सुनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार और प्रशासन की तरफ से किसी भी विशेष समुदाय को लक्षित करके कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने सांसदों को आश्वस्त किया कि पूरे मामले को पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ देखा जा रहा है ताकि सामाजिक सद्भाव बना रहे।
मुद्दा आधारित राजनीति
बातचीत के अंत में दोनों सांसदों ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी राजनीति किसी दल विशेष की समर्थक या विरोधी होने के बजाय पूरी तरह से आम जनता के हितों पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा:
“यदि सरकार आम जनता की भलाई के लिए कोई अच्छा कदम उठाती है, तो हम उसका पूरा समर्थन करेंगे। लेकिन यदि मुर्शिदाबाद या पूरे पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और हितों के खिलाफ कोई कदम उठाया जाता है, तो हम सड़क से लेकर संसद तक उसका कड़ा विरोध करेंगे।”
इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में इन दोनों सांसदों का रुख काफी लचीला और रणनीतिक रहने वाला है, जो सीधे तौर पर राज्य के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।







