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राहुल गांधी ने लेख के जरिए छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से मांगी जवाबदेही

नई दिल्ली,अंग भारत। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 जुलाई को संसद के पास शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र में लिखे अपने लेख में राहुल गांधी ने स्पष्ट मांग की है कि इस हिंसक कार्रवाई की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य यानी हमारे छात्रों पर आंसू गैस के गोले दागने, लाठियां बरसाने और घातक पेलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया, इसका जवाब सरकार को तुरंत देना होगा। राहुल गांधी के अनुसार, यदि देश के गृह मंत्री अमित शाह को इस कार्रवाई की जानकारी थी तो वह इसके लिए सीधे जिम्मेदार हैं, और यदि उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी, तो यह देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संभालने में उनकी गंभीर प्रशासनिक अक्षमता को उजागर करता है।

20 जुलाई को क्या हुआ?

देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों की संख्या में युवा 20 जुलाई को दिल्ली पहुंचे थे। ये छात्र देश की शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियों, धांधली और बार-बार होने वाले पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही की मांग कर रहे थे। वे एक पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे। राहुल गांधी ने अपने लेख में लिखा है कि छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में था। युवा सिर्फ अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग का रास्ता चुना। संसद से मात्र 500 मीटर की दूरी पर सुरक्षा बलों ने छात्रों पर बेरहमी से लाठियां बरसाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे कई युवा गंभीर रूप से चोटिल हो गए।

सुरक्षा बलों के इस्तेमाल पर सवाल

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब यह संवेदनशील प्रदर्शन चल रहा था, तब वहां दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान मुस्तैद थे। ये सभी सुरक्षा बल सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं। इस स्थिति में यह सोचना असंभव है कि इतनी बड़ी कार्रवाई बिना किसी उच्च स्तरीय निर्देश के हो गई। राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को घेरते हुए दो टूक शब्दों में दो बड़ी संभावनाएं सामने रखी हैं:

  • पहली संभावना: गृह मंत्री अमित शाह ने खुद छात्रों पर बल प्रयोग करने और पेलेट गन चलाने की अनुमति दी थी। अगर ऐसा है, तो इस हिंसा और छात्रों के खून बहने की पूरी जिम्मेदारी गृह मंत्री की बनती है।
  • दूसरी संभावना: गृह मंत्री को इस गंभीर कार्रवाई और पुलिस के एक्शन की कोई जानकारी ही नहीं थी। अगर यह सच है, तो यह देश के प्रशासनिक तंत्र पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है कि गृह मंत्री की नाक के नीचे इतनी बड़ी घटना हो गई और उन्हें पता तक नहीं चला।

साहिल लोचाब की आपबीती

अपने लेख में राहुल गांधी ने एक 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचाब का विशेष रूप से जिक्र किया है, जिनसे उन्होंने खुद मुलाकात की थी। साहिल इस बर्बर पुलिस कार्रवाई का सीधा शिकार हुए। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा चलाई गई पेलेट गन के छर्रे साहिल के शरीर के ऊपरी हिस्से में लगे। बेहद दर्दनाक बात यह है कि एक छर्रा सीधे साहिल की आंख में जा घुसा। डॉक्टरों के अनुसार, इस गंभीर चोट की वजह से साहिल की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जाने का खतरा मंडरा रहा है। राहुल गांधी ने पूछा कि एक युवा जो सिर्फ एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहा था, उसे इस तरह जीवनभर का अंधेरा देने का गुनहगार कौन है?

बिहार में भी दमनकारी कार्रवाई

छात्रों के खिलाफ यह दमनकारी नीति सिर्फ देश की राजधानी दिल्ली तक ही सीमित नहीं रही। राहुल गांधी ने अपने लेख में बिहार की स्थिति का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि बिहार के अररिया और सिवान समेत विभिन्न जिलों में भी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे छात्र प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया और उन पर गोलियां तक चलाई गईं। इस पुलिसिया बर्बरता के कारण बिहार में भी कई युवा गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह दिखाता है कि युवाओं की जायज मांगों को सुनने के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी आवाज को डराने-धमकाने और लाठियों के दम पर दबाने का एक व्यवस्थित प्रयास किया जा रहा है।

संसद में चर्चा से कतराती सरकार

इस पूरी घटना के बाद उम्मीद की जा रही थी कि सरकार संसद में इस पर संवेदनशीलता दिखाएगी। लेकिन हकीकत इसके उलट रही। विपक्ष ने संसद के भीतर इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर गहन चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने न तो इस पूरे घटनाक्रम की जांच के कोई आदेश दिए और न ही इस पर संसद के पटल पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया। राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सच का सामना करने से बच रही है और संसद जैसी लोकतांत्रिक संस्था में जनता के मुद्दों को दबाने का काम कर रही है।

सोशल मीडिया पर मानसिक उत्पीड़न

सरकारी कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। राहुल गांधी ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शन में शामिल युवा छात्राओं और उनके अभिभावकों को निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर इन महिलाओं को ट्रोल किया जा रहा है, उनका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है और उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए मजबूर किया जा रहा है। राहुल गांधी ने साफ किया कि देश का युवा अब चुप बैठने वाला नहीं है। वह अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हो चुका है और सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ सवाल पूछता रहेगा। विपक्ष हर कदम पर इन संघर्षरत युवाओं के साथ मजबूती से खड़ा है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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