रांची, अंग भारत। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी और धांधली के मामले में सीआईडी की जांच तेज हो गई है, जिसके तहत आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य सोमवार को पूछताछ के लिए रांची स्थित अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के मुख्यालय पहुंचीं। परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर सीआईडी ने जेपीएससी के तीन तत्कालीन सदस्यों को समन भेजा था, जिसके बाद इन सभी सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। अब जांच एजेंसी इन पूर्व सदस्यों से परीक्षा के संचालन, कॉपियों के मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया में हुई संदिग्ध हेरफेर को लेकर तीखे सवाल-जवाब कर रही है।
पूछताछ के मुख्य बिंदु
सीआईडी की टीम डॉ. अजिता भट्टाचार्य से सीधे तौर पर परीक्षा प्रक्रिया के उस हिस्से पर सवाल कर रही है जहां प्रशासनिक फैसले लिए जाते थे। जांच टीम का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि क्या परीक्षा के आयोजन में स्थापित नियमों को ताक पर रखा गया था। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
- परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्रों की गोपनीयता कैसे लीक हुई या कॉपियों के मूल्यांकन में क्या गड़बड़ी की गई।
- भर्ती प्रक्रिया के दौरान आयोग के अंदरूनी अधिकारियों और बाहरी तत्वों के बीच क्या कोई सांठगांठ थी।
- सदस्यों के पास आने वाली फाइलों और उन पर लिए गए फैसलों की कानूनी वैधता क्या थी।
तीन सदस्यों का इस्तीफा
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सीआईडी ने जेपीएससी के तीन सदस्यों को पूछताछ के लिए समन जारी किया। समन मिलते ही इन तीनों सदस्यों ने बिना देरी किए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। डॉ. अजिता भट्टाचार्य के अलावा अन्य सदस्यों के इस्तीफे ने भी कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि इस्तीफा देना जांच के दायरे से बचने की कोशिश हो सकती है, हालांकि पूर्व सदस्यों का कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
“जब भी किसी राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा विवादों में आती है, तो सिर्फ कुछ अधिकारियों पर आंच नहीं आती, बल्कि लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाता है जो वर्षों तक एक-एक कमरे में रहकर तैयारी करते हैं।”
छात्रों का नुकसान
झारखंड में जेपीएससी की परीक्षाओं को लेकर विवाद नया नहीं है। जब भी परीक्षाएं होती हैं, कोर्ट-कचहरी और जांच का दौर शुरू हो जाता है। इससे न केवल नियुक्तियां लटकती हैं, बल्कि राज्य के युवाओं का व्यवस्था पर से भरोसा भी उठने लगता है। परीक्षाओं का समय पर न होना और होने पर विवादों में घिरना झारखंड के युवाओं के करियर को अंधकार में धकेल रहा है।
सीआईडी की कार्रवाई
सीआईडी इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। डॉ. अजिता भट्टाचार्य से पहले जांच एजेंसी आयोग के कई निचले स्तर के अधिकारियों, क्लर्कों और कंप्यूटर ऑपरेटरों से भी लंबी पूछताछ कर चुकी है। सीआईडी के पास कुछ ऐसे दस्तावेजी सबूत भी हाथ लगे हैं जो परीक्षा में बड़े पैमाने पर हेरफेर की ओर इशारा करते हैं। डिजिटल डेटा और हार्ड कॉपियों का मिलान किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फाइनल मेरिट लिस्ट में बदलाव करने के लिए मार्क्स के साथ छेड़छाड़ की गई थी या नहीं।
जेपीएससी का इतिहास
झारखंड लोक सेवा आयोग का इतिहास शुरू से ही विवादों से घिरा रहा है। इससे पहले भी प्रथम और द्वितीय जेपीएससी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे, जिसकी जांच सीबीआई तक को सौंपनी पड़ी थी। पूर्व में कई चेयरमैन और सदस्यों को जेल तक जाना पड़ा था। वर्तमान सीआईडी जांच भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है, जहां बार-बार सुधार के दावों के बावजूद परीक्षा प्रणाली में सेंधमारी हो जाती है।
जांच की समयरेखा
| तारीख / चरण | मुख्य घटनाक्रम | जांच एजेंसी का एक्शन |
|---|---|---|
| प्रारंभिक चरण | जेपीएससी परीक्षा में धांधली और अनियमितता की शिकायतें दर्ज हुईं। | सीआईडी ने प्राथमिक जांच शुरू की और फाइलें जब्त कीं। |
| मध्यम चरण | आयोग के कर्मचारियों और क्लर्कों से लंबी पूछताछ की गई। | डिजिटल सबूत और परीक्षा कॉपियों की जांच की गई। |
| समन और इस्तीफा | जेपीएससी के तीन सदस्यों को सीआईडी का समन मिला। | तीनों सदस्यों ने तत्काल प्रभाव से अपने पदों से इस्तीफा दिया। |
| ताजा कार्रवाई | पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य सीआईडी कार्यालय पहुंचीं। | सीआईडी मुख्यालय में आमने-सामने बैठकर पूछताछ जारी है। |
आगे क्या होगा?
इस पूछताछ के बाद सीआईडी अन्य दो पूर्व सदस्यों को भी बुलाने की तैयारी में है। अगर डॉ. अजिता भट्टाचार्य के बयानों में और जब्त किए गए दस्तावेजों में विसंगतियां पाई जाती हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। कानूनविदों का मानना है कि यदि अनियमितताओं के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीआईडी की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में बड़ा भूचाल ला सकती है।







