Founder – Mohan Milan

रांची में सीआईडी कार्यालय पहुंचीं जेपीएससी की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य

रांची में जेपीएससी परीक्षा धांधली की जांच के लिए सीआईडी कार्यालय पहुंचीं पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य

रांची, अंग भारत। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर प्रकरण की जांच कर रही सीआईडी ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में, जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य सोमवार को रांची स्थित सीआईडी मुख्यालय पहुंचीं। उन्हें आयोग की चयन प्रक्रिया और परीक्षा संचालन में हुई संदिग्ध हेरफेर को लेकर विस्तृत पूछताछ का सामना करना पड़ा। सीआईडी ने जेपीएससी के तीन तत्कालीन सदस्यों को समन भेजा था, जिसके तुरंत बाद इन सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। वर्तमान में जांच एजेंसी कॉपियों के मूल्यांकन, प्रश्न पत्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक निर्णयों में बरती गई कथित लापरवाही पर बारीकी से काम कर रही है।

पूछताछ का दायरा

सीआईडी की टीम ने डॉ. अजिता भट्टाचार्य से उन प्रशासनिक फैसलों के बारे में सवाल किए जो परीक्षा की शुचिता को प्रभावित कर सकते थे। जांच एजेंसी के पास कई ऐसे इनपुट मौजूद हैं जिनसे संकेत मिलता है कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान स्थापित नियमों की अनदेखी की गई थी। इस पूछताछ में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया जा रहा है:

  • परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्रों की गोपनीयता भंग होने के संभावित कारणों की जांच।
  • कॉपियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए क्या प्रोटोकॉल अपनाए गए थे।
  • आयोग के भीतर के अधिकारियों और बाहरी तत्वों के बीच मिलीभगत की संभावना।
  • आयोग की फाइलों पर लिए गए निर्णयों की कानूनी और संवैधानिक वैधता।

सदस्यों का इस्तीफा

सीआईडी द्वारा समन जारी किए जाने के कुछ ही समय के भीतर जेपीएससी के तीन सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। डॉ. अजिता भट्टाचार्य के अलावा अन्य सदस्यों के इस कदम ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, पूर्व सदस्यों का कहना है कि वे जांच प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अचानक उठाया गया कदम जांच की गंभीरता को दर्शाता है।

“जब भी किसी राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा विवादों में आती है, तो सिर्फ कुछ अधिकारियों पर आंच नहीं आती, बल्कि लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाता है जो वर्षों तक एक-एक कमरे में रहकर तैयारी करते हैं।”

छात्रों पर असर

झारखंड में लोक सेवा परीक्षाओं को लेकर उठने वाले विवाद कोई नई बात नहीं हैं। बार-बार कोर्ट-कचहरी और जांच के फेर में परीक्षाएं फंसने से राज्य के युवाओं का मनोबल टूट रहा है। लाखों अभ्यर्थी अपनी मेहनत के दम पर सफलता पाने का सपना देखते हैं, लेकिन व्यवस्था की विफलता के कारण उनका करियर अधर में लटक जाता है। यह स्थिति न केवल युवाओं के समय की बर्बादी है, बल्कि सरकारी तंत्र के प्रति उनके भरोसे को भी कम करती है।

गहन जांच प्रक्रिया

सीआईडी ने मामले की तह तक जाने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया है। डॉ. अजिता भट्टाचार्य से पूछताछ से पहले, जांच एजेंसी आयोग के क्लर्कों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और अन्य निचले स्तर के कर्मचारियों से लंबी पूछताछ कर चुकी है। सीआईडी के पास अब डिजिटल डेटा और परीक्षा संबंधी दस्तावेज मौजूद हैं। इन दस्तावेजों का हार्ड कॉपी के साथ मिलान किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या मेरिट लिस्ट में मार्क्स के साथ छेड़छाड़ की गई थी।

ऐतिहासिक विवाद

जेपीएससी का इतिहास लंबे समय से विवादित रहा है। पूर्व की परीक्षाओं में भी बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे, जिसके कारण सीबीआई तक को जांच सौंपी गई थी। उस दौरान कई शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों और सदस्यों को जेल की हवा खानी पड़ी थी। वर्तमान सीआईडी जांच को उसी पुराने ढर्रे के सुधार और जवाबदेही तय करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

जांच की समयरेखा

चरण मुख्य घटनाक्रम एजेंसी की कार्यवाही
प्रारंभिक चरण अनियमितताओं की शिकायतें दर्ज हुईं फाइलों को जब्त कर जांच शुरू की
मध्यम चरण कर्मचारियों और ऑपरेटरों से बयान दर्ज डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण
समन दौर तीन सदस्यों को समन जारी सदस्यों का पद से इस्तीफा
ताजा चरण डॉ. अजिता भट्टाचार्य सीआईडी मुख्यालय पहुंचीं आमने-सामने की विस्तृत पूछताछ

अगले कदम

आने वाले समय में सीआईडी अन्य दो पूर्व सदस्यों को भी जांच के घेरे में लेगी। यदि डॉ. अजिता भट्टाचार्य के बयानों और साक्ष्यों के बीच विसंगतियां पाई जाती हैं, तो कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। कानून के जानकारों के अनुसार, दोषी पाए जाने पर जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। यह जांच केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड के पूरे चयन तंत्र में सुधार की दिशा में एक बड़ा संकेत हो सकती है।

Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
Picture of अंग भारत • रिपोर्टर

अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

Related Posts
Recent Posts
App Icon